पुलिसकर्मियों का ग्रेड-पे बढ़ाने अब महाकाल से अरदास, चिट्ठी में लिखी यह बात

पुलिसकर्मियों का ग्रेड-पे बढ़ाने अब महाकाल से अरदास, चिट्ठी में लिखी यह बात

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में पुलिस आरक्षकों का ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2400 करने की मांग अब जोर पकड़ रही है। अब तक कई विधायक  पुलिसकर्मियों  की मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। अब पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी कराने महाकाल के दरबार में अर्जी लगाई गई है।

बाबा महाकाल को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि हमारी सुरक्षा में 24 घंटे मुस्तैद रहने वाली मध्य प्रदेश पुलिस के जवानों की कई वर्षों से लंबित पड़ी मांगों पर बाबा महाकाल आप से प्रार्थना करते हैं कि हमारे पुलिसकर्मी दूसरे शासकीय कर्मचारियों की तरह धरना भूख हड़ताल आदि नहीं कर सकते। क्योंकि वह अनुशासन में बंधे होते हैं हमारे जवानों के ऊपर हमारी सुरक्षा का जिम्मा होता है और हमारे पुलिसकर्मियों द्वारा किसी तरह की अनुशासनहीनता आज तक नहीं की। लेकिन इसके बावजूद हमारे पुलिसकर्मियों की कोई नहीं सुनता है। पत्र में लिखा कि हमारे कई जवान आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है । बाबा महाकाल हमारे पुलिसकर्मी करें भी तो क्या करें । जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। बाबा महाकाल आपसे प्रार्थना है कि इन मांगों को लेकर आप जिम्मेदारों को एहसास करवाएं की पुलिसकर्मी भी इंसान है और कष्टदायक जीवन जी रहे हैं। बाबा महाकाल हमारे पुलिसकर्मियों की इन मांगों को पूरा करवाने की कृपा करें।

पुलिसकर्मियों की मांगें

-गृह जिले में तैनाती
-वर्तमान 1900 ग्रेड पे से बढाकर 2400 ग्रेड पे किया जाए
– पुलिसकर्मियों का बर्खास्त यूनियन को फिर से बहाल किया जाए
-एक दिवस का साप्ताहिक अवकाश दिया जाए

-मध्य प्रदेश सशस्त्र पुलिस बल की कम्पनी का 10 वर्षों के स्थाई किया जाए व परिवार साथ में रखने की अनुमति दी जाए।

-साईकिल भत्ता 1861 से 18 रुपए माह चल रहा है। जिसकी जगह मोटर साईकिल भत्ता पेट्रोल 3000 माह रूपए किया जाए।

-आवास भत्ता 5000 रुपए महीना किया जाए जो कि वर्तमान में 500 रुपए है।

-दो हाफ वेतन को फुल किया जाए

-रात्रि गश्त ड्यूटी का भत्ता 300 रुपए शुरू किया जाए

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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