अब विभागों के बंटवारे पर फंसा पेंच, शिवराज दिल्ली रवाना

अब विभागों के बंटवारे पर फंसा पेंच, शिवराज दिल्ली रवाना

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में लम्बे मंथन के बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के बाद अब विभागों के बंटवारे पर पेंच फंस गया है| मंत्रियों के शपथ लेने के दो दिन बाद भी अब तक विभागों का वितरण नहीं हो पाया है| इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) दिल्ली रवाना हो गए हैं| दिल्ली में सीएम केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। श्री चौहान का कल दोपहर वापस लौटने का कार्यक्रम है। सूत्रों के मुताबिक विभागों को लेकर शिवराज केंद्रीय नेतृत्व और ज्योतिरादित्य सिंधिया से विभागों को लेकर चर्चा कर सकते हैं|

सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हुई माथापच्ची के बाद अब विभागों के बंटवारे पर भी सहमति नहीं बन पा रही है| शिवराज और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच शुक्रवार को इसको लेकर मशक्कत हुई। अब विभागों का मामला भी दिल्ली में सुलझने की संभावना है| वहां केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद शिवराज कल दोपहर भोपाल वापस लौटेंगे। यहां पर मंत्रियों के विभागों को लेकर चर्चा की जाएगी। ज्योतिरादित्या सिंधिया से भी मिलने का कार्यक्रम है।

वरिष्ठ नेताओं और नए मंत्रियों के बीच कामकाज कैसे बांटें यह मुश्किलें हैं। बड़े विभागों को लेकर माथापच्ची है| सिंधिया बड़े विभाग चाहते हैं, कमलनाथ सरकार में भी सिंधिया खेमे के मंत्रियों के पास बड़े विभाग थे| स्वास्थ्य, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, परिवहन, श्रम और खाद्य विभाग सिंधिया खेमे के पास थे। ऐसे में शिवराज सरकार में भी इसमें से कुछ विभाग सिंधिया खेमे के पास रहने की संभावना है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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