राज्यसभा चुनाव: 13 माह बाद ‘महाराज’ फिर बने सासंद, दिग्विजय को मिले 57 वोट

राज्यसभा चुनाव: 13 माह बाद ‘महाराज’ फिर बने सासंद, दिग्विजय को मिले 57 वोट

भोपाल| राज्यसभा चुनाव (Rajyasabha Election) के नतीजे घोषित हो चुके हैं| परिणाम के साथ ही यह साफ़ हो गया है कि भाजपा (BJP) से दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और सुमेर सिंह सोलंकी, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) राज्यसभा पहुँच गए हैं| सबसे ज्यादा वोट दिग्विजय सिंह को मिले हैं| संख्या बल के आधार पर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा के खाते में दो सीट आएँगी| परिणाम के बाद अब यह साफ़ हो गया है|

ज्योतिरादित्य सिंधिया 13 माह बाद एक बार फिर सांसद बन गए हैं| सिंधिया को 56 वोट मिले हैं| उनकी जीत के साथ समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है, साथ ही केंद्रीय मंत्री बनाये जाने की मांग भी की जा रही है| वहीं भाजपा के दूसरे प्रत्याशी सुमेर सिंह सोलंकी को 55 वोट मिले हैं | कांग्रेस से दिग्विजय सिंह को 57 वोट मिले और फूल सिंह बरैया को 36 वोट मिले हैं| 2 वोट निरस्त किये गए हैं|

इससे पहले सुबह से विधानसभा में विधायकगण मतदान के लिए पहुंचे और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मतदान किया। इस दौरान यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, मंत्री नरोत्तम मिश्रा सहित कई वरिष्ठ नेता व विधायक मतदान करने पहुंचे। आखिरी वोट कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने डाला। कुणाल चौधरी कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से पीपीई किट में मतदान करने पहुंचे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews