
Ajay Singh
मध्यप्रदेश में आवारा और निराश्रित पशुओं की समस्या को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार के आश्वासन के बावजूद जमीनी स्तर पर समस्या का प्रभावी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह बेअसर और बेपरवाह हो चुकी है और इसका खामियाजा किसानों तथा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र में आवारा पशुओं की गंभीर समस्या पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से किसानों और आमजन को राहत दिलाने के लिए जल्द ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी हालात में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में आवारा पशु खेतों और सड़कों पर परेशानी का कारण बने हुए हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
अजय सिंह ने कहा है कि किसान बड़ी मेहनत और लागत से तैयार की गई अपनी फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए रात-दिन खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। इसके बावजूद पशुओं के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और उनकी आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि फसल खराब होने से पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कई किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने समस्या के समाधान के लिए घोषणाएं तो कीं, लेकिन उनका असर खेतों तक नहीं पहुंच पाया है।
विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
बता दें कि इस साल फरवरी में मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अजय सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए निराश्रित गौवंश और आवारा पशुओं की समस्या उठाई थी। उस समय कांग्रेस की ओर से दावा किया गया था कि प्रदेश में करीब 10 लाख निराश्रित पशु सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान के साथ सड़क हादसों और यातायात संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
सरकार ने दिया ये जवाब
सरकार की ओर से सदन में बताया गया था कि वर्ष 2025 में नगरीय निकायों ने सड़कों पर घूम रहे करीब 78,153 आवारा मवेशियों को पकड़ा, जबकि पशुओं को खुला छोड़ने वाले मालिकों पर करीब 25.58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। सरकार ने यह भी बताया था कि प्रदेश की 3,040 गौशालाओं में करीब 4.80 लाख पशुओं को आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है। विधानसभा में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल ने बताया था कि निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और नगरीय क्षेत्रों में नगरीय विकास विभाग के माध्यम से निभाई जा रही है। सरकार ने यह भी कहा था कि गौशालाओं में पशुओं के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौवंश प्रतिदिन कर दी गई है।
यह सरकार पूरी तरह बेअसर और बेपरवाह हो चुकी है! pic.twitter.com/fjNyESkwcT
— MP Congress (@INCMP) August 18, 2026
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

