भोपाल में कॉमरेड आर. बी. मोरे के जीवन पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण, ‘संविधान और नागरिकता दांव पर’ विषय पर हुई परिचर्चा

किताब में कॉमरेड आर. बी. मोरे के डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर के निकट सहयोग, महाड आंदोलनों में सक्रिय भूमिका और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक न्याय के लिए किए गए प्रयास और दलित मुक्ति की दिशा में उनकी प्रेरक गतिविधियों को इस पुस्तक के माध्यम से जाना जा सकता है।
Comrade R. B. More

Comrade R. B. More Biography

‘लोकजतन’ और ‘बहुजन इंटेलेक्ट’ ने राजधानी भोपाल स्थित स्थानीय राज्य संग्रहालय में एक परिचर्चा, संवाद एवं पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया। ‘संविधान और नागरिकता दांव पर’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। परिचर्चा से पहले किताब ‘दलित मुक्ति से वर्ग संघर्ष तक कॉमरेड आर. बी. मोरे का जीवन’ का विमोचन हुआ। विमोचन उपरांत कॉमरेड आर.बी. मोरे के ग्रैंडसन सुबोध मोरे ने किताब पर विस्तार से अपनी बात रखी। किताब की अनुवादक संध्या शैली ने किताब के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का वाचन किया।

इस परिचर्चा में सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और लेखक सुबोध मोरे (मुम्बई), सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और चिंतक कॉमरेड बादल सरोज, लेखक-अनुवादक और चिंतक संध्या शैली, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता संजय कामले, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हुमैद शकील, डोमा परिसंघ मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर एआर सिंह, ‘बहुजन इंटेलेक्ट’ के संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. (मेजर) मनोज राजे ने भागीदारी की। वहीं इस अहम परिचर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक ​डॉ. विजय बहादुर सिंह ने संभाली।

परिचर्चा और पुस्तक लोकार्पण 

‘वाम प्रकाशन’ से प्रकाशित किताब ‘दलित मुक्ति से वर्ग संघर्ष तक कॉमरेड आर. बी. मोरे का जीवन’ कॉमरेड आर. बी. मोरे की आपबीती और जीवनी है, जिसका लेखन और सम्पादन उनके बेटे सत्येन्द्र मोरे ने किया है। बता दें कि कॉमरेड रामचन्द्र बाबाजी मोरे डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर के निकट सहयोगी रहे हैं। डॉ. आम्बेडकर के नेतृत्व में महाड में हुए दो महत्वपूर्ण आन्दोलनों के वे आयोजक थे। मोरे 1930 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और महाराष्ट्र के सबसे सम्मानित कम्युनिस्ट लीडरों में शुमार किए गए। ज़ाहिर है कि उनकी पूरी ज़िन्दगी रोमांचक और घटनाप्रधान रही।

कॉमरेड आर. बी. मोरे के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित किताब

इस किताब को पढ़ना एक अलग ही दौर और अनुभव से गुज़रना है। ‘दलित मुक्ति से वर्ग संघर्ष तक कॉमरेड आर. बी. मोरे का जीवन’ मूल रूप से मराठी में लिखी गई थी, और इसका अंग्रेज़ी अनुवाद पहले ही आ चुका है। हिन्दी अनुवाद संध्या शैली ने किया है, जो ख़ुद एक कम्युनिस्ट लीडर एवं सोशल एक्टिविस्ट हैं।

परिचर्चा का संचालन ‘बहुजन इंटेलेक्ट’ के समन्वयक सुनील बोरसे ने किया। परिचर्चा के आखिर में सवाल जवाब का सत्र भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी तादाद में नगर के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, लेखक-साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे जिनमें राजेश जोशी, रामप्रकाश त्रिपाठी, पलाश सुरजन, पीयूष बबेले, वीरेन्द्र जैन, एसआर आज़ाद, विनय द्विवेदी, डॉ. राहुल शर्मा, शबाना, कॉमरेड जसविंदर सिंह शामिल थे।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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