भोपाल में शिया समुदाय ने मनाई काली ईद, ईरान हमले और खामेनेई की मौत पर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लगाए नारे

भोपाल में शिया समुदाय ने ईरान पर हमले और सर्वोच्च नेता और धर्मगुरु खामेनेई की मौत के विरोध में ईद-उल-अजहा का पर्व 'काली ईद' के रूप में मनाया। फतेहगढ़ मस्जिद में नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर और पुराने कपड़े पहनकर अपना दुख और गुस्सा जाहिर किया, साथ ही अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी भी की।
भोपाल में शिया समुदाय ने मनाई काली ईद, ईरान हमले और खामेनेई की मौत पर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लगाए नारे

भोपाल: ईद-उल-अजहा के मौके पर जहां देशभर में जश्न का माहौल था, वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिया समुदाय ने इसे ‘काली ईद’ के रूप में मनाया। ईरान पर हुए हमले में मुजतबा हुसैनी खामेनेई की मौत से दुखी और नाराज समुदाय के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया। शहर की फतेहगढ़ मस्जिद में ईद की नमाज के दौरान माहौल गमगीन दिखा।

नमाज अदा करने पहुंचे लोग, यहां तक कि बच्चे भी, अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधे हुए थे और उन्होंने नए कपड़ों की जगह पुराने वस्त्र धारण किए थे। यह ईरान के साथ एकजुटता दिखाने और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट करने का एक तरीका था। चेहरों पर खुशी की जगह दुख, रंज और आक्रोश साफ झलक रहा था।

मस्जिद में गूंजे अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद के नारे

फतेहगढ़ मस्जिद में ईद की नमाज के बाद खुतबे (धार्मिक उपदेश) के दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया, जब लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारों से मस्जिद गूंज उठी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके सर्वोच्च नेता को मारा गया है, जिसका दर्द और गुस्सा उनके दिलों में है।

खुशियों पर गम का साया

ईद, जो खुशियों और मिलन का त्योहार है, उस पर इस बार शिया समुदाय के लिए गम का साया रहा। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “जब हमारे सर्वोच्च नेता हमारे बीच नहीं हैं, तो हम जश्न कैसे मना सकते हैं? यह हमारे लिए शोक का दिन है।” बच्चों तक ने इस विरोध में हिस्सा लिया, जो दिखाता है कि समुदाय में आक्रोश कितना गहरा है।

“हमारे सुप्रीम लीडर को मारा गया है। हम इस ईद को खुशी से नहीं मना सकते। यह हमारे लिए शोक और विरोध का दिन है।” — एक प्रदर्शनकारी

मध्य प्रदेश में शिया समुदाय की आबादी लगभग 10 हजार है। इनमें से करीब 4 हजार लोग भोपाल में रहते हैं। इसके अलावा इंदौर, रतलाम, सारंगपुर और बुरहानपुर जैसे शहरों में भी शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं, जहां इसी तरह का गम और गुस्सा देखने को मिला।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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