सीटू और अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर देशभर में मना एकजुटता दिवस

सीटू और अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर देशभर में मना एकजुटता दिवस

भोपाल

गुरूवार को सीटू और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के आह्वान पर देशभर में एकजुटता दिवस मनाया गया। कोरोना से लड़ाई में मोर्चे पर डटे मेहनतकश डाक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, दवा देने वाले कर्मचारी, जांच कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, एंबुलेंस ड्राइवर, आंगनवाड़ी आशा कार्यकर्ता सहित तमाम लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए ये देशव्यापी दिवस मनाया गया।

सीटू ने इसका आव्हान किया था और अखिल भारतीय किसान सभा ने समर्थन दिया था।इसमें कोरोना आपदा से देश को बचाने में जुटे डॉक्टर्स, नर्स, मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉयज, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर्स, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, दूध, बिजली, दवा लाने वाले, पानी पिलाने वाले और डण्डा नहीं चलाने वाले पुलिस कर्मियों तथा नगरपालिका, पंचायत कर्मचारियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित की गई। साथ ही 8 मांगों के समर्थन में पोस्टर लेकर नारे उठाये गए। 

सीटू और अखिल भारतीय किसान सभा ने रखी 8 मांगें-
🔵 सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को सुरक्षा उपकरण तथा रेड जोन वालो को पीपीई दी जाए
🔵 उनकी लगातार कोविद-19 संक्रमण की मुफ्त जांच कराई जाए
🔵 सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स का 50 लाख का बीमा करने – उनके परिजनो को मुफ्त इलाज की सीमा में लाया जाए
🔵 कोरोना ड्यूटी पर लगे ठेका तथा स्कीम वर्कर्स को 25 हजार रु माह इंसेंटिव अलग से दिया जाए
🔵 ड्यूटी करते संक्रमित हुए लोगों को 5 लाख रु का मुआवजा दिया जाए
🔵 सब जरूरतमंदों को मुफ्त खाना तथा राशन दिया जाए
🔵 सभी गैर-आयकरदाता भारतीयों के खाते में स्थिति सामान्य होने तक हर माह 7500 रुपए जमा कराया जाए
🔵 इसी के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली मजबूत करते हुए स्वास्थ्य पर जीडीपी का 5 प्रतिशत खर्च करने तथा,
🔵 स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की मांग शामिल हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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