नक्सल के साये से विकास की राह पर बालाघाट, बोंदारी-कोरका पहुंचने वाले पहले CM बने डॉ.मोहन यादव, 100 गांवों को 225 करोड़ की सौगात

नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी-कोरका में ग्रामीणों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने सुनीं समस्याएं, 225 करोड़ की पहल से 100 गांवों में सड़क-बिजली, शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यटन तक विकास की तैयारी
CM Dr. Mohan Yadav visits tribal village Balaghat

CM Dr. Mohan Yadav visits tribal village Balaghat

कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे बालाघाट के इलाकों में अब सरकार ने विकास और रोजगार पर बड़ा फोकस करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को जिले के नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी और कोरका गांव पहुंचे और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की विकास और आजीविका पहल आगे बढ़ाने की घोषणा की।

बताया गया कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री बालाघाट जिले के इन नक्सल प्रभावित गांवों में ग्रामीणों के बीच पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने लोगों से उनकी समस्याएं जानीं और पशुपालन, आवास, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और वन विभाग से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को ग्रामीणों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने के निर्देश भी दिए।

सुरक्षा के बाद अब विकास और रोजगार पर फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का संकल्प ‘सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार’ है। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।

225 करोड़ रुपये की पहल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, स्वास्थ्य, पीएचई, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जनजातीय कार्य और पर्यटन सहित विभिन्न विभागों के जरिए काम किए जाएंगे। इसका मकसद गांवों में सामाजिक सुविधाएं मजबूत करने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ाना है।

CM बोले- सड़क को बाजार और गांव को रोजगार से जोड़ना है

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लक्ष्य केवल गांव तक सड़क पहुंचाना नहीं है, बल्कि सड़क को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ना है। बालाघाट में एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

कृषि, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग के जरिए ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने की योजना है। स्थानीय उत्पादों का क्षेत्र में ही वैल्यू एडिशन कर उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को छोटे उद्यमों से जोड़ने पर भी काम किया जाएगा।

बालाघाट की प्राकृतिक और जनजातीय विरासत को देखते हुए पर्यटन, ईको-टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म को भी रोजगार से जोड़ने की तैयारी है।

नक्सलमुक्त बालाघाट उपलब्धि, समृद्ध बालाघाट अगला लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट अब एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “नक्सलमुक्त बालाघाट हमारी उपलब्धि है, लेकिन समृद्ध और आत्मनिर्भर बालाघाट हमारा अगला लक्ष्य है।”

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।

बैगा समाज के विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने बैगा समाज के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बैगा परिवारों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, सड़क, बिजली और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा। बैगा युवाओं को कौशल, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के साथ उनकी पारंपरिक कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम होगा।

कार्यक्रम से पहले बालाघाट की लाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, सांसद भारती पारधी, मंत्री संपतिया उइके, विधायक संजय उइके और मधु भगत सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

Atul Saxena
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Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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