मध्यप्रदेश में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों के लिए कांग्रेस ने गठित की विशेष समिति, सिंगरौली सहित कई क्षेत्रों में करेगी जमीनी अध्ययन

यह समिति आदिवासी बहुल और वन क्षेत्रों का स्थलीय अध्ययन करेगी। स्थानीय लोगों से संवाद कर जमीनी स्थिति का आकलन करेगी और वन कटाई, विस्थापन तथा अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति के निष्कर्षों के आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी।
MP Congress Committee

Congress Special Committee

मध्यप्रदेश में जल, जंगल, ज़मीन और आदिवासी अधिकारों के संरक्षण को लेकर कांग्रेस ने एक समिति का गठन किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस विशेष समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर सिंगरौली और आदिवासी बहुल इलाकों में जंगलों की कटाई, विस्थापन और आदिवासी समुदाय के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करना है।

कांग्रेस ने कहा है कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में जल, जंगल और ज़मीन से जुड़े मुद्दे गंभीर होते जा रहे हैं। आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर पड़ रहे प्रभाव और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी, स्थानीय लोगों से संवाद करेगी और जमीनी स्थिति का आकलन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों के संरक्षण के लिए समिति का गठन

एमपी में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह निर्णय प्रदेश में वन क्षेत्रों की कटाई, आदिवासी समुदायों के कथित विस्थापन और उनके पारंपरिक अधिकारों पर हो रहे प्रभावों की जांच के उद्देश्य से लिया गया है। समिति मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के निर्देश पर गठित की गई है। इसका मुख्य कार्य सिंगरौली सहित प्रदेश के विभिन्न आदिवासी एवं वन-आधारित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करना और जमीनी हकीकत की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना होगा।

ये हैं समिति के सदस्य

कांग्रेस द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार इस समिति में उमंग सिंघार, कमलेश्वर पटेल, अजय सिंह और विक्रांत भूरिया को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर आदिवासी समाज, पर्यावरणीय स्थिति और स्थानीय समुदायों की समस्याओं का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही यह समिति शासन-प्रशासन से जुड़े मामलों और पुनर्वास नीतियों के प्रभावों की भी समीक्षा करेगी और उस आधार पर विस्तृत सुझाव और सिफारिशें तैयार करेगी। पार्टी का कहना है कि समिति के सुझावों के आधार पर आदिवासी समाज, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस ने दोहराया कि वह आदिवासी वर्ग के साथ मजबूती से खड़ी है और जल, जंगल व ज़मीन की सुरक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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