टोल कंपनियां मुनाफे में, फिर भी क्यों जारी है वसूली? अजय सिंह ने सरकार से पूछे सवाल

मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने टोल परियोजनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री को पत्र लिखकर पूछा है कि जब टोल कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं। ऐसे में टोल वसूली जारी रखने का आधार क्या है?
Ajay Singh

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मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और चुरहट विधायक अजय सिंह ‘राहुल भैया’ ने भोपाल–देवास, जावरा–नयागांव और लेबड़–जावरा टोल परियोजनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को पत्र लिखकर कहा कि तीनों टोल कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं। ऐसे में टोल वसूली जारी रखने का आधार क्या है, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

अजय सिंह ने कहा कि ऑडिट रिपोर्टों के अनुसार कंपनियां लगातार अच्छा ऑपरेटिंग प्रॉफिट कमा रही हैं। उनके शेयर भी ऊंची कीमत पर बिके हैं और विदेशी निवेशकों ने भी इनमें निवेश किया है। उनका कहना है कि घाटे में चल रही कंपनी में न तो इतना निवेश होता है और न ही करोड़ों रुपये का लाभांश बांटा जाता है।

उन्होंने भोपाल–देवास टोल परियोजना के वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में कंपनी का प्रति शेयर लाभ और ऑपरेटिंग प्रॉफिट लगातार बढ़ा है। कंपनी ने करोड़ों रुपये का लाभांश बांटा और सीएसआर पर भी खर्च किया। इससे साफ है कि परियोजना लाभ में है।

अजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने बीओटी अनुबंध की शर्तों के विपरीत प्रमोटरों को अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि जब सरकार अनुबंध की अहम शर्तों में बदलाव कर सकती है, तो लागत से कई गुना अधिक टोल वसूली होने पर टोल बंद करने का फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा।

अजय सिंह ने टोल वसूली पर उठाये सवाल 

उन्होंने “कुल वास्तविक व्यय” की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीओटी अनुबंध और कंपनियों की ऑडिट रिपोर्ट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यह केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण-पत्र के आधार पर तैयार किया गया आंकड़ा है, जिसका अनुबंध में कोई उल्लेख नहीं है।

अजय सिंह ने विधानसभा में दिए गए पुराने सरकारी जवाब का हवाला देते हुए कहा कि सरकार पहले खुद मान चुकी है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण-पत्र का अनुबंध में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में अब उसी आधार पर टोल वसूली जारी रखने का फैसला किस कानूनी प्रावधान के तहत लिया गया है।

परियोजनाएं लाभ में तो फिर क्यों वसूला जा रहा टोल

उन्होंने सरकार से पूछा कि जब परियोजनाएं लाभ में हैं और अनुबंध में लागत के दोबारा आकलन का प्रावधान नहीं है, तो आखिर किस आधार पर जनता से लगातार टोल वसूला जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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