विधायक फूलसिंह बरैया का यू टर्न, दी सफाई, कहा- वो मेरा बयान नहीं, कांग्रेस बता चुकी है निजी विचार

जिस बयान को लेकर मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह मेरा स्वयं का बयान नहीं है। वह बयान हरिमोहन झा साहब का है, जो बिहार में दर्शनशास्त्र के एचओडी रह चुके हैं। मैंने उस कथन को केवल एक संदर्भ में कोट किया था। मैं स्वयं उस बयान से सहमत नहीं हूँ।
Phool Singh Baraiya

कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया ने महिलाओं को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर यू टर्न लिया है और कहा है कि ये उनका बयान नहीं है, उन्होंने किसी दूसरे के बयान का उदाहरण दिया था, बता दें अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को लेकर दिए अमर्यादित बयान के बाद बरैया चौतरफा घिर गए थे , पार्टी ने भी उनके बयान से किनारा कर लिया था वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित भाजपा नेताओं ने उनपर जबरदस्त हमला बोला , पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई जगह बरैया का पुतला जलाकर विरोध जताया

ये मेरा बयान नहीं मैं इससे सहमत नहीं : बरैया 

दिन भर भाजपा सहित अपनी ही पार्टी ने निशाने पर रहे कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया ने देर रात इसपर सफाई दी उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जिस बयान को लेकर मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह मेरा स्वयं का बयान नहीं है। वह बयान हरिमोहन झा साहब का है, जो बिहार में दर्शनशास्त्र के एचओडी रह चुके हैं। मैंने उस कथन को केवल एक संदर्भ में कोट किया था। मैं स्वयं उस बयान से सहमत नहीं हूँ।

कांग्रेस ने बरैया के बयान को बताया था निजी विचार  

बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने फूलसिंह बरैया के बयान से किनारा करते हुए कहा था कि वह उनका व्यक्तिगत विचार है। कांग्रेस पार्टी इस प्रकार के बयान से इत्तेफाक नहीं रखती है। पार्टी ने इस संदर्भ में उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा है। वहीं कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने भी फूल सिंह बरैया के विवादित बयान का खंडन करते हुए उन्हें उनका ‘निजी विचार’ बताया है। उन्होंने ‘रुद्रयामल तंत्र’ ग्रंथ के उद्धरण से दिए गए बयान का तथ्यात्मक खंडन करते हुए कहा है कि प्राचीन धार्मिक ग्रंथों की संकीर्ण और भ्रामक व्याख्या सामाजिक एकता के लिए घातक है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बिना गहन अध्ययन के किए गए बयान समाज में अविश्वास और विभाजन की भावना को जन्म दे सकते हैं, जो राष्ट्रीय सौहार्द के खिलाफ है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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