भोपाल: समझाने पर भी नहीं मान रहे लोग, 20 दिन में लॉकडाउन उल्लंघन की 867 FIR

भोपाल: समझाने पर भी नहीं मान रहे लोग, 20 दिन में लॉकडाउन उल्लंघन की 867 FIR

भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना के खतरे को देखते हुए पुलिस सख्ती से लॉक डाउन का पालन करा रही है| लेकिन राजधानी में लोगों की जिद के आगे पुलिस भी परेशान है| तमाम कोशिशों के बाद भी लोग मान नहीं रहे और लॉक डाउन का उल्लंघन कर रहे हैं| भोपाल में 22 मार्च से लेकर 10 अप्रैल तक 867 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। उल्लंघन के ज्यादातर मामले पुलिस ने नए शहर में दर्ज किए हैं। 24 घंटे में 57 बेवजह घूमने वाले लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार एमपी नगर में तीन, गोविंदपुरा, अवधपुरी, शाहपुरा अशोकागार्डन तलैया में सबसे अधिक नौ मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस लगातार चेक प्वाइंट पर कार्रवाई कर रही है। इसके बाद लोग बाजार में बेवजह घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब पुलिस सख्ती दिखाने की तैयारी कर रही है।

सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ सन्देश लगातार वायरल हो रहे हैं| मिसरोद इलाके में एक युवक ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया है। युवक पोस्ट के माध्यम से लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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