अब कलेक्टर ने ठाना…कुपोषण को जड़ से मिटाना

अब कलेक्टर ने ठाना…कुपोषण को जड़ से मिटाना

धार।
एक तरफ जहां कुपोषण को लेकर आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है वही दूसरी तरफ आदिवासी अंचलों में कुपोषित बच्चों के लिए धार कलेक्टर श्रीकांत बनोठ नई पहल शुरु करने जा रहे है। जिसके तहत कलेक्टर सात फरवरी को रात आठ बजे से PROjansampark Dhar के Facebook पेज पर लाईव होंगे और लोगों से सीधे चर्चा करेंगें। इसमें लोगों को कुपोषण से बचने के उपाय बताए जाएंगे और उनसे सलाह भी ली जाएगी, ताकी इसे जड़ से उखाड़ा जा सके। इसके लिए कलेक्टर ने अपना वाट्सएप नंबर भी जारी किया है। कलेक्टर के इस जोश और जूनून को देखते हुए लगता है कि कलेक्टर ने अब ठान लिया है कि कुपोषण को जड़ से मिटाना है।उम्मीद की जा रही है कि कलेक्टर की यह पहल जरुर रंग लाएगी।

दरअसल, पिछले सर्वे के दौरान धार जिले में करीब छह हजार बच्चे कुपोषित पाए गए थे। हालांकि करीब दो हजार बच्चों का वजन बढ़ा है, लेकिन अभी के आंकड़े देखें तो कुपोषित बच्चों की संख्या में 975 बच्चे और जुङे है। इसका कारण फ्लोरोसिस , जिसके कारण कुपोषण बढ रहा है।कलेक्टर का कहना है कि हमारा उद्देश्य जिले के लगभग 2500 नौहिहालों को कुपोषण से मुक्ती दिलाना है। मेरा मानना है कि 21.85 लाख जिलेवासियों के सपोर्ट और ईमानदार शासकीय प्रयास से हम एक झटके में ही इस कलंक से मुक्ति पा सकेंगे।

इससे पहले कलेक्टर ने कुपोषण को लेकर गंभीरता नहीं होने पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा था कि जिले की एनआरसी खाली है… कुपोषित बच्चों को केंद्रों पर नहीं लाया जा रहा है। मजदूरी से लौट रहे बच्चों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पिछले सर्वे के दौरान धार जिले में करीब छह हजार बच्चे कुपोषित पाए गए थे। हालांकि करीब दो हजार बच्चों का वजन बढ़ा है, लेकिन अभी के आंकड़े देखें तो कुपोषित बच्चों की संख्या में 975 बच्चे और जुड़ गए हैं। यह बहुत गंभीर मामला है। इसे गंभीरता से लें यह आपके लिए आखिरी वार्निंग है।वही उन्होंने कुपोषण के क्षेत्र में पलायन करने वाले बच्चों के सीजनल माइग्रेशन पर भी विशेष रूप से ध्यान देने को कहा था।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews