कमलनाथ का शिवराज को पत्र, लॉकडाउन के बीच सरकार से की यह बड़ी मांग

कमलनाथ का शिवराज को पत्र, लॉकडाउन के बीच सरकार से की यह बड़ी मांग

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को पत्र लिखा है| उन्होंने पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी धर्म एवं पंथ स्थलों में पूजा-अर्चना के लिये 5000 रूपये प्रतिमाह और पूजा करने वाले व्यक्ति को 7500 रूपये प्रतिमाह देने की मांग की है|

कमलनाथ ने पत्र में लिखा है कि मध्य प्रदेश में हिंदू मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित विभिन्न धर्मों और पंथों के धर्मावलंबी निवास करते हैं| प्रत्येक धर्म एवं पंत की पूजा और आराधना के स्थल भी प्रदेश में स्थित है जिनका संचालन अपने अपने धर्मों के अनुसार किया जाता है | कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों के चलते धर्म स्थलों का सुचारू संचालन नहीं हो पा रहा है | लॉक डाउन के कारण श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ नहीं आ पाने से दान आदि भी बाधित हो गया है | किसी तरह से व्यवस्थाएं निर्मित कर धर्म स्थलों में पूजा-अर्चना एवं अन्य प्रथाओं को पूर्ण किया जा रहा है|

उन्होंने कहा पुजारियों मौलवियों अन्य पंत गुरुओं आदि को भी जीवन यापन करने में कठिनाई आ रही है| यह विषय प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था का विषय है अतः आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के सभी धर्म एवं पंत स्थलों में पूजा अर्चना करने के लिए 5000 रुपए प्रतिमाह और पूजा करने वाले व्यक्तियों को जीवन यापन के लिए रुपए 7500 प्रतिमाह की न्यूनतम आर्थिक सहायता राशि आगामी 3 माह तक प्रदान करने का निर्णय लेने का कष्ट करें|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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