राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू के मध्यप्रदेश दौरे के बीच जीतू पटवारी ने उन्हें लिखा खुला पत्र, आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं पर हस्तक्षेप की मांग

इस पत्र में आदिवासी युवाओं के पलायन, वन आधारित आजीविका पर बढ़ते संकट, लघु वनोपज के उचित मूल्य की कमी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, भूमि विवाद और वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को भी उठाया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि विकास की मुख्यधारा में आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
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Jitu Patwari

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज पांच दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर पहुंचीं। इंदौर एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनका स्वागत किया। अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति बैतूल में ब्रह्माकुमारी संस्थान के कार्यक्रम में शामिल होंगीं, ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगीं तथा अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगी। इसके अलावा वह जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के साथ कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भी दौरा करेंगीं।

राष्ट्रपति के मध्यप्रदेश दौरे के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उनके नाम एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है। कांग्रेस नेता ने राष्ट्रपति से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वनाधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवैधानिक भावना के अनुरूप हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र 

जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा है कि योजनाओं की घोषणाओं से आगे बढ़कर अब संवैधानिक न्याय को धरातल पर उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक आदिवासी आबादी वाला राज्य है जहां अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या करीब 1.53 करोड़ है जो कुल आबादी का लगभग 21 प्रतिशत है। इस पत्र में उन्होंने झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी जैसे जिलों में विकास की स्थिति को चिंताजनक बताया।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार सहित अन्य मुद्दे उठाए

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा है कि शिक्षा के क्षेत्र में साक्षरता दर राज्य के औसत (70 प्रतिशत से अधिक) से काफी कम करीब 50 प्रतिशत है। खासकर आदिवासी लड़कियों की शिक्षा सबसे पिछड़ी हुई है। कई स्कूलों में शिक्षक पद खाली पड़े हैं और दूर-दराज के छात्रावासों की हालत खराब है। स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिक केंद्रों में डॉक्टरों की कमी, कुपोषण, एनीमिया, मातृ-शिशु मृत्यु दर और सहरिया जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों में टीबी जैसी समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं। बेरोजगारी के कारण युवा पलायन को मजबूर हैं। वन क्षेत्रों में परंपरागत आजीविका साधनों का सिकुड़ना, लघु वनोपज का उचित मूल्य न मिलना और विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन की समस्याएं भी उठाई गई हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध, भूमि विवाद और वन अधिकार कानून के कमजोर क्रियान्वयन का जिक्र भी पत्र में है।

पत्र की प्रमुख मांगें

कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे अपने मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान इन मुद्दों पर राज्य सरकार को निर्देश दें।

  • आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा और स्वास्थ्य आपात योजना।
  • रिक्त शिक्षक-डॉक्टर पदों पर समयबद्ध भर्ती।
  • वनाधिकार कानून (FRA) और पेसा कानून का पूर्ण क्रियान्वयन।
  • आदिवासी युवाओं के लिए विशेष रोजगार व कौशल मिशन।
  • कुपोषण और टीबी पर विशेष अभियान।
  • TSP फंड का पारदर्शी उपयोग।
  • सड़क, पेयजल, इंटरनेट और उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार।
  • आदिवासी स्थिति पर उच्चस्तरीय समीक्षा आयोग का गठन।
Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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