कमलनाथ ने MP में कई पोषण आहार प्लांट बंद होने पर सरकार को घेरा, कहा ‘बीजेपी छीन रही है महिलाओं की आजीविका’

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 300 करोड़ रुपए के कर्ज, सप्लाई बंद होने और अनुदान में देरी के कारण कई प्लांट ठप हो गए है जिससे महिलाएं मजदूरी करने को मजबूर हैं। इस स्थिति को कुपोषण की समस्या से जोड़ते हुए उन्होंने प्लांट्स को तुरंत चालू करने और पोषण योजनाओं को मजबूत करने की मांग की है।
Kamal Nath

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में महिला संचालित पोषण आहार प्लांटों की बदहाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ‘नारी वंदन’ का ढोल पीटने वाली बीजेपी सरकार असलियत में महिलाओं की आजीविका छीन रही है। उन्होंने कहा कि हालत यह है कि जो महिलाएं अभी तक प्लांट का संचालन करती थीं, अब वह मज़दूरी कर अपना पेट पालने को मजबूर हैं।

कांग्रेस नेता ने प्रदेश में कुपोषण की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जहां पहले से ही कुपोषण राष्ट्रीय औसत से अधिक है, वहां पोषण आहार प्लांटों का बंद होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी प्लांटों को फिर से चालू कराए और पोषण योजनाओं को मजबूत करे।

कमलनाथ ने बीजेपी सरकार को घेरा

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कमलनाथ ने कहा है कि “महिला वंदन का ढोल पीट रही भाजपा के शासन में प्रदेश के पोषण आहार प्लांट बंद पड़े हैं। इन प्लांटों पर करीब 300 करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है और प्राइवेट सप्लायर ने आपूर्ति रोक दी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को यह कर्ज चुकाना था, लेकिन प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंचा ही नहीं, जिससे समस्या और गहराती गई।” उन्होंने यह भी कहा कि जो महिलाएं पहले इन प्लांटों का संचालन कर आत्मनिर्भर बनी थीं, वे अब रोजगार के अभाव में मजदूरी करने को मजबूर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार के महिलाओं के सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़े करती है।

सभी पोषण आहार प्लांट शुरु कराने की मांग 

कमलनाथ ने प्रदेश में कुपोषण की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि एमपी में पहले से ही कुपोषण राष्ट्रीय औसत से अधिक है, वहां पोषण आहार प्लांटों का बंद होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर सभी प्लांटों को फिर से चालू कराए और पोषण योजनाओं को मजबूत करे।

दरअसल लगभग नौ साल पहले महिला स्व-सहायता समूहों को पोषण आहार तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था। इसका मकसद था कि ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ बच्चों और किशोरियों के पोषण में योगदान दें, बल्कि खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। सात जिलों में स्थापित इन प्लांटों ने शुरू में महिलाओं को रोजगार और सम्मान दोनों दिए। लेकिन अब कई प्लांट महीनों से बंद पड़े हैं। कारण है पुराने तय रेट पर काम करना, बढ़ती उत्पादन लागत और समय पर अनुदान न मिलना। नतीजा ये हुआ कि प्लांटों पर कर्ज लगातार बढ़ता गया और सप्लायरों ने भुगतान न होने के कारण कच्चा माल देना बंद कर दिया है जिस कारण पोषण आहार प्लांट बंद हो गए हैं।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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