कूनो नेशनल पार्क से फिर आई अच्छी खबर, चीता ज्वाला तीसरी बार बनी मां, पांच शावकों को दिया जन्म, सीएम डॉ मोहन यादव ने जताई खुशी

पांच नए शावकों के जन्म के साथ ही भारत में चीतों की कुल आबादी अब 53 हो गई है, जो पचास का आंकड़ा पार कर चुकी है। 
CM Dr Mohan Yadav Cheetah Jwala cubs born

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मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है, यहाँ एक बार फिर चीतों के कुनबे में वृद्धि हुई है, नामीबियाई मादा चीता ज्वाला तीसरी बार मां बनी है उसने आज 9 मार्च को पांच शावकों को जन्म दिया है, नये शावकों का जन्म के साथ ही अब भारत में चीतों की संख्या 53 हो गई है

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शावकों के जन्म की तस्वीरों को X पर साझा किया है, उन्होंने लिखा- कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक और खुशखबरी… चीता ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो चीता परियोजना के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके साथ ही, भारत में चीतों की कुल संख्या पचास का आंकड़ा पार कर 53 हो गई है। वन्यजीव संरक्षण के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है और भारत में चीतों के पुनर्वास के प्रयासों की सफलता का एक सशक्त प्रमाण है।

चीता ज्वाला ने पांच शावकों को दिया जन्म 

भारत में चीतों का घर बना मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क ने शावकों के जन्म की खुशियाँ मना रहा है, यहाँ मादा चीता लगातार मां बन रहीं हैं जो चीता प्रोजेक्ट की सफलता का प्रमाण है, पिछले महीने ही दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था और आज 9 मार्च को नामीबिया से लाइ गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है।

भारत में जन्मे शावकों की संख्या 33 पहुंची 

कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन के मुताबिक पांच नए शावकों के जन्म के साथ ही भारत में जन्मे स्वस्थ शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो भारतीय धरती पर चीतों के दसवें सफल प्रसव का प्रतीक है, भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

चीतों की कुल आबादी 53 हो गई है 

यह उपलब्धि पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ और सभी संबंधित पक्षों के समर्पित प्रयासों, कौशल और प्रतिबद्धता को दर्शाती है जो लगातार अथक परिश्रम कर रहे हैं। इन शावकों के जन्म के साथ ही भारत में चीतों की कुल आबादी अब 53 हो गई है, जो पचास का आंकड़ा पार कर चुकी है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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