लक्ष्मण की नसीहत, ‘राम के नाम पर राजनीति अब बंद करें राजनेता’

लक्ष्मण की नसीहत, ‘राम के नाम पर राजनीति अब बंद करें राजनेता’

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट

अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) भूमि पूजन (bhumi pujan) के बाद अब मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में सियासत गरमाई हुई है| विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास का स्वागत तो किया लेकिन वार पलटवार का दौर थम नहीं रहा है| भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं| इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह (Lakshman Singh) ने दोनों दलों के नेताओं को ‘श्रीराम’ के नाम पर राजनीति न करने की नसीहत दी है|

दरअसल, राम मंदिर भूमिपूजन के बाद गुरूवार को चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर नेताओं को नसीहत दी है| उन्होंने ट्वीट कर लिखा-‘राम मंदिर का शिलान्यास हो गया,रामजी सबका भला करें।अब सभी राजनेताओं से विनम्र आग्रह है कि देश की अन्य समस्याओं पर ध्यान दें,और रामजी के नाम पर राजनीति करना बंद करें’।

लक्ष्मण सिंह अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते है, भाजपा ही नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी पर वे निशाना साधने से नहीं चूकते| कर्जमाफी, सीएए जैसे अनेकों मुद्दों पर वो अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके है| एक बार फिर उन्होंने अपने ट्वीट से ‘राम’ के नाम पर प्रदेश में चल रही सियासत पर नेताओं को कड़ी नसीहत देते हुए विकास पर फोकस करने की बात कही है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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