मोहन सरकार ने बदली टेक होम राशन व्यवस्था, स्व-सहायता समूह तैयार करेंगे पोषण आहार, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगा लाभ

अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेशभर में नई THR व्यवस्था लागू, स्थानीय स्व-सहायता समूहों को जोड़ा गया; कुपोषित बच्चों के लिए भी अतिरिक्त पोषण
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मध्य प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाले पोषण आहार की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मोहन सरकार ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई टेक होम राशन (THR) व्यवस्था लागू कर दी है। अब स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार THR प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए हितग्राहियों को दिया जा रहा है।

नई व्यवस्था में 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों और गर्भवती व धात्री माताओं को मंगलवार को गर्म पका भोजन और बाकी दिनों में THR दिया जाएगा। वहीं 3 से 6 साल तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर रोज नाश्ता और गर्म पका भोजन देने की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। पात्र हितग्राहियों को साल में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं देने का प्रावधान है।

कुपोषित बच्चों पर भी रहेगा फोकस

6 से 60 महीने तक के अति गंभीर कुपोषित (SAM) और 6 से 72 महीने तक के अति कम वजन (SUW) वाले बच्चों को अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार THR दिया जाएगा।

आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और लंबाई-ऊंचाई मापकर पोषण ट्रैकर पर जानकारी दर्ज की जा रही है, कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों की स्वास्थ्य जांच और नियमित फॉलोअप के साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाएगा।

जनजातीय क्षेत्रों में 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र

विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी पोषण सेवाओं का दायरा बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र शुरू किए गए हैं। सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय वाले क्षेत्रों में बच्चों और माताओं की पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नई THR व्यवस्था के जरिए सरकार एक तरफ बच्चों और महिलाओं तक स्थानीय स्तर पर तैयार पोषण आहार की पहुंच बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को भी मजबूत किया जा रहा है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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