MP विधानसभा मानसून सत्र: कांग्रेस विधायक महेश परमार ने की निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन निजी विश्वविद्यालयों के गुणवत्ता मानकों को कमजोर करेंगे। कांग्रेस नेता ने विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजकर व्यापक चर्चा कराने और सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही इस पर आगे बढ़ने की मांग की है।
Mahesh Parmar

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मध्यप्रदेश विधानसभा में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार पर उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन निजी विश्वविद्यालयों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों को समाप्त कर शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर डालेंगे। कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

महेश परमार ने कहा कि सरकार व्यापम घोटाले, नर्सिंग कॉलेज घोटाले और पेपर लीक जैसी घटनाओं से सबक लेने के बजाय निजी विश्वविद्यालयों के लिए आवश्यक मानकों में ढील देने जा रही है। उनके अनुसार, यह कदम छात्रों के भविष्य, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और प्रदेश की साख पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

कांग्रेस विधायक ने निजी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को लेकर किए सवाल

विधानसभा में चर्चा के दौरान महेश परमार ने कहा कि संशोधन विधेयक में मूल अधिनियम, 2007 की धारा-7 में बदलाव किए गए हैं, जिन्हें निजी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाला प्रमुख प्रावधान माना जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संशोधनों से विश्वविद्यालय खोलने की न्यूनतम शर्तें कमजोर हो जाएंगी। उन्होंने विशेष रूप से 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त कर “पर्याप्त भूमि” शब्द जोड़ने, पांच करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की अनिवार्यता हटाने तथा प्रशासनिक भवन के लिए 2500 वर्गमीटर क्षेत्रफल की शर्त खत्म करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के हटने से छोटे परिसरों में भी विश्वविद्यालय संचालित किए जा सकेंगे और छात्रों व कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा कमजोर होगी।

कांग्रेस विधायक ने छत्तीसगढ़ में वर्ष 2003 के बाद बड़ी संख्या में निजी विश्वविद्यालय खुलने और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को उसी स्थिति की ओर नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय व्यवसाय नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के केंद्र होते हैं और केवल संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। महेश परमार ने सरकार से पूछा कि इतने बड़े बदलाव से पहले क्या किसी विशेषज्ञ समिति से राय ली गई, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों से चर्चा की गई तथा यदि ऐसा हुआ है तो उसकी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रावधानों का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए जल्दबाजी में संशोधन उचित नहीं है।

सरकार से की ये मांगें

महेश परमार ने कहा कि यदि यह विधेयक लागू हुआ तो प्रदेश के छात्रों का निजी विश्वविद्यालयों पर भरोसा कमजोर होगा, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और रोजगार के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। इसी के साथ कांग्रेस ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं। पार्टी ने विधेयक को तत्काल वापस लेने, इसे संयुक्त प्रवर समिति (जॉइंट सेलेक्ट कमेटी) को भेजकर व्यापक चर्चा कराने और सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय और प्रस्तावित केंद्रीय शिक्षा कानून के बाद ही किसी संशोधन पर विचार करने की मांग की।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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