
Kamal Nath
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में एलपीजी आपूर्ति में कमी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच सिर्फ दस दिन तक चले युद्ध का असर अब सीधे प्रदेश के घर-घर की रसोई तक पहुंचने लगा है। उन्होंने कहा कि ‘आज की यह स्थिति एक चेतावनी है। यदि अभी भी सरकार ने इससे सीख नहीं ली, तो भविष्य में कोई भी बड़ा संकट प्रदेश की जनता के लिए और भी अधिक मुश्किलें पैदा कर सकता है।
कांग्रेस नेता ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि खबरों के अनुसार प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति लगभग 30 प्रतिशत तक घट गई है। स्थिति यह है कि सरकार को उद्योगों और अन्य उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति सीमित करने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे सिर्फ आपूर्ति संकट नहीं बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारी की कमी का संकेत भी बताया।
एमपी में गैस की कमी को लेकर कमलनाथ ने सरकार से किए सवाल
कमलनाथ ने सवाल किया कि यदि दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में हुई सीमित अवधि की लड़ाई का असर सीधे मध्यप्रदेश की रसोई तक पहुंच सकता है तो इससे सरकार की तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है, जिससे संकट की स्थिति में भी जनता को जरूरी वस्तुओं की कमी न झेलनी पड़े।
पूर्व सीएम ने कहा कि एलपीजी आज आम नागरिक के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। गरीब परिवारों से लेकर मध्यम वर्ग तक हर घर की रसोई गैस पर निर्भर है। ऐसे में यदि आपूर्ति 30 प्रतिशत तक घटने की स्थिति बनती है तो यह सिर्फ प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि नीतिगत विफलता का संकेत भी माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर अपनी उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन संकट की घड़ी में व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है। यदि दस दिन की अंतर्राष्ट्रीय स्थिति से प्रदेश की गैस व्यवस्था प्रभावित हो जाती है तो किसी बड़े वैश्विक संकट की स्थिति में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
भविष्य के लिए मज़बूत व्यवस्था करने का आग्रह किया
कमलनाथ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस स्थिति से सबक लेते हुए आवश्यक वस्तुओं के लिए मजबूत भंडारण व्यवस्था, वैकल्पिक आपूर्ति प्रणाली और प्रभावी आपातकालीन प्रबंधन योजना तैयार की जाए ताकि भविष्य में जनता को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की वास्तविक क्षमता का आकलन सामान्य परिस्थितियों में नहीं बल्कि संकट के समय होता है। इसलिए सरकार को दूरदर्शी नीतियों के साथ जनता को भरोसा दिलाना चाहिए कि कठिन परिस्थितियों में भी उनकी आवश्यक जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी।
10 दिन के युद्ध का असर मध्यप्रदेश की रसोई तक; क्या सरकार किसी भी आपदा के लिए तैयार है?
दो दूसरे देशों के बीच चल रहे केवल 10 दिन के युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश के घर-घर तक दिखाई देने लगा है। खबरों के अनुसार प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति लगभग 30% तक घट गई है और सरकार को अब उद्योगों… pic.twitter.com/TpBtxq8VF8
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) March 11, 2026
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

