MP News : सीएम डॉ मोहन यादव बोले- पंचायत सचिवों की भूमिका गांव और शासन के बीच सेतु जैसी है

सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा हमारी सरकार, पंचायती राज्य व्यवस्था के माध्यम से सभी क्षेत्रों में काम कर रही है। साल 2026 को हम कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं इसमें 16 विभाग योगदान देंगे।
Panchayat Secretary Conference CM Dr. Mohan Yadav

Panchayat Secretary Conference CM Dr. Mohan Yadav

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भोपाल में आयोजित म.प्र. पंचायत सचिव महासंघ महासम्मेलन में शामिल हुए।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा शासन की योजनाओं के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन की सबसे सशक्त इकाई पंचायत है। पंचायतों की मजबूती से ही योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं और जन-जन तक उनका लाभ पहुंचता है पंचायत सचिवों की भूमिका गांव और शासन के बीच सेतु की होती है।

भोपाल के दशहरा मैदान पर आज भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध संगठन म.प्र. पंचायत सचिव महासंघ ने महासम्मेलन का आयोजन किया , कायर्क्रम में प्रदेश भर से पंचायत सचिव शामिल हुए, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मौजूद रहे वहीँ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल सम्मेलन में विशेष रूप से शामिल हुए।

गांवों में बसती है भारत की आत्मा 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा भारत की आत्मा गांवों में बसती है, इसीलिए कहा जाता है कि सशक्त गांव ही सशक्त भारत की मजबूत नींव हैं। उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि योजनाओं के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन की सबसे सशक्त इकाई पंचायत है। पंचायतों की मजबूती से ही योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं और जन-जन तक उनका लाभ पहुंचता है।

पंचायत सचिव की भूमिका महत्वपूर्ण 

सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा हमारी सरकार, पंचायती राज्य व्यवस्था के माध्यम से सभी क्षेत्रों में काम कर रही है। साल 2026 को हम कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं इसमें 16 विभाग योगदान देंगे। उन्होंने कहा सरकार के इन 16 विभागों के माध्यम से गाँव गाँव तक, जनता तक योजनाओं को पहुँचाने का काम आप करते हैं, आपकी भूमि बहुत महत्वपूर्ण है । मुख्यमंत्री ने कहा पंचायत सचिवों की भूमिका गांव और शासन के बीच सेतु की होती है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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