
Umang Singhar
उमंग सिंघार ने राज्य में रिडेंसिफिकेशन परियोजनाओं को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रिडेंसिफिकेशन के नाम पर प्रदेश में सरकारी ज़मीन की “खुली डकैती” की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विकास नहीं बल्कि राज्य प्रायोजित लूट का उदाहरण बन गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के 17 जिलों में अफसर–डेवलपर गठजोड़ के माध्यम से जनता की अरबों रुपये की बेशकीमती सरकारी ज़मीन औने-पौने दामों पर निजी हाथों में सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि लगभग 1000 करोड़ रुपये के निवेश के बहाने करीब 6000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी ज़मीन डेवलपर्स को दे दी गई, जिससे जनता के हितों को भारी नुकसान हुआ है।
कांग्रेस ने लगाए रिडेंसिफिकेशन परियोजनाओं को लेकर आरोप
उमंग सिंघार ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मध्यप्रदेश में रिडेंसिफिकेशन नीति के नाम पर सरकारी जमीनों की बड़े पैमाने पर लूट का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि किया कि प्रदेश के सत्रह जिलों में अफसरों और निजी डेवलपर्स के गठजोड़ से जनता की अरबों रुपये की संपत्ति को बहुत कम दाम पर बेच दिया। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि रिडेंसिफिकेशन के बहाने सिर्फ 1000 करोड़ रुपये के एवज में 6000 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी जमीनें निजी डेवलपर्स को थमा दी गईं। उन्होंने इसे राज्य स्तर पर संरक्षित और प्रायोजित लूट करार दिया तथा कहा कि ‘यह रिडेंसिफिकेशन के नाम पर सरकारी ज़मीन की खुली डकैती है।’
उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल
कांग्रेस नेता ने इस मामले पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कई सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि ‘किसके आदेश पर इतनी मूल्यवान सरकारी जमीनें इतने कम दामों में आवंटित की गईं। किन-किन अफसरों और किन बिल्डरों डेवलपर्स की जेबें भरी गईं तथा जनता की जमीन और उसका पैसा आखिर किसने हड़प लिया।’ इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि इन घोटालों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी, कब तक जांच बैठेगी और जिम्मेदार अफसरों पर एफआईआर कब दर्ज होगी। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता सवाल पूछती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है, घोटाले उजागर होते हैं तो पर्दा डाल दिया जाता है और जब अफसर कटघरे में आते हैं तो उन्हें इनाम, ट्रांसफर या प्रमोशन मिल जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को विकास के नाम पर बेचा जा रहा है लेकिन जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
रीडेंसिफिकेशन के नाम पर सरकारी ज़मीन की खुली डकैती !
17 जिलों में अफसर–डेवलपर गठजोड़ ने जनता की अरबों की संपत्ति को औने -पौने दामों में लुटा दिया। 1000 करोड़ के बहाने 6000 करोड़ की बेशकीमती सरकारी ज़मीन निजी हाथों में सौंप दी गई। यह विकास नहीं, यह राज्य प्रायोजित लूट है।
सरकार… pic.twitter.com/A2ZlATKtnp
— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 21, 2026
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

