MP में टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव पर कांग्रेस के आरोप, उमंग सिंघार बोले “बच्चों के पोषण पर भी भाजपा का कमीशन मॉडल”

उन्होंने पूछा कि बार-बार व्यवस्था बदलने से किसका फायदा हो रहा है और 85 लाख हितग्राहियों की कीमत पर किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि सरकार को हर कुछ साल में पूरी व्यवस्था बदलनी पड़ रही है तो यह नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों पर सवाल खड़े करता है।
Umang Singhar

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मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले टेक होम राशन (THR) की व्यवस्था में हुए बदलाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर बच्चों के पोषण कार्यक्रम में “कमीशन मॉडल” अपनाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में टेक होम राशन व्यवस्था को पांचवीं बार बदला गया है। उनके मुताबिक, सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि पिछले चार से पांच महीनों के दौरान कई क्षेत्रों में पोषण आहार की आपूर्ति बाधित रही, सप्लाई चेन प्रभावित हुई और करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने सवाल किया कि बार-बार व्यवस्था बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है और इससे आखिर किसे फायदा पहुंच रहा है।

उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कुप्रबंधन का खामियाजा 85 लाख बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों हितग्राहियों के पोषण से जुड़े कार्यक्रम में लगातार बदलाव और अव्यवस्था गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस नेता ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा कि बच्चों के पोषण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति और कथित मुनाफाखोरी कब तक जारी रहेगी। उन्होंने पूछा कि इस अव्यवस्था का ज़िम्मेदार कौन है और बार बार व्यवस्था बदलने से किसे फायदा हो रहा है।

सरकार ने बदली है व्यवस्था

बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने टेक होम राशन की व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी वापस लेकर इसे महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) को सौंप दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य पोषण आहार की गुणवत्ता में सुधार, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना है। छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार होने वाले पोषण आहार की तैयारी, पैकेजिंग और आपूर्ति अब महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी में होगी। हालांकि, पात्र स्व-सहायता समूह उत्पादन कार्य से जुड़े रहेंगे, लेकिन उन्हें नए गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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