अब ड्रोन उड़ाने के लिए 10वीं पास होना जरुरी, नई पॉलिसी लागू

Indore G-20 Meeting

भोपाल। आजकल शादी पार्टी या अन्य आयोजनों में ड्रोन कैमरों से शूटिंग के चलन बढ़ गया है। लेकिन अब ड्रोन को चलाना सबके लिए मुमकिन नहीं होगा। इसके लिए अब नगर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने नई पॉलिसी लागू कर दी है। अब ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस के नियम भी तय किए गए हैं। लाइसेंस तभी मिलेगा, जब आवेदक की उम्र 18 साल से ज्यादा होगी और वह 10वीं पास होगा। इसके साथ ही अंग्रेजी जानना भी जरूरी है।

नई पॉलिसी के तहत ड्रोन का पंजीयन कराना जरूरी कर दिया गया है और आवेदन की अंतिम तारीख 31 जनवरी तय की गई । इसके अलावा ड्रोन के इस्तेमाल से 24 घंटे पहले इस बात की जानकारी स्थानीय थाने को देनी होगी, लेकिन 60 मीटर से ऊपर ड्रोन को नहीं उड़ा सकेंगे।ड्रोन को सिर्फ दिन में ही उड़ा सकते हैं। रात में इस्तेमाल के लिए डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी। ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करने पर आईपीसी की धारा 287, 336, 337, 338 के तहत जुर्माने और सजा का प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए इसका रजिस्ट्रेशन, ऑपरेटर परमिट और उड़ाने से पहले क्लियरेंस लेना जरूरी है। इसके लिए डीजीसीए की वेबसाइट पर डिजिटल स्काय नाम से प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। वहीं डीजीसीए से इम्पोर्ट क्लीयरेंस के अलावा यूआईएन (यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर) और यूएओपी (अनमैन्ड एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट) जारी होगा, वही रिन्यूअल भी करेगा। यूआईएन के लिए 1 हजार और यूएओपी के लिए 25 हजार रुपए फीस लगेगी। हालांकि यूएओपी 5 साल तक वैलिड होगा और बाद में रिन्यूअल के लिए 10 हजार रुपए की फीस देनी होगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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