किसानों के बैंक ऋण को लेकर अब तोमर ने की बड़ी रियायत की घोषणा

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भोपाल

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देश के किसानों को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि किसानों को 31 मार्च तक अपना फसल ऋण बैंक में जमा करने पर ब्याज की जो सब्सिडी दी जाती थी उसे अब 31 मई तक बढ़ा दिया है, यानी अब 31 मई तक कर्ज की राशि बैंक में जमा करने वाले किसानों को भी ब्याज की सब्सिडी मिलेगी। तोमर ने इसकी वजह देश में वर्तमान में कोरोना की वजह से चल रहा लाकडाउन बताया ।

इसी के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीबों को खाद्यान्न की कमी ना हो , इसके लिए उचित मूल्य की दुकानों से 3 महीने का राशन तो दिया ही गया है, इसके अलावा 3 महीने तक 5 किलो चावल, 5 किलो गेहूं और 1 किलो दाल भी निशुल्क दी जाएगी । तोमर ने बताया कि अभी तक सात करोड़ किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान योजना की राशि पहुंच चुकी है और शेष अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक पहुंच जाएगी। किसानों को फलों की फसल में नुकसान ना हो इसके लिए उनके नुकसान की भरपाई केंद्र और राज्य सरकार आधा-आधा करेंगे , इस बात के निर्देश भी राज्यों को दे दिए गए हैं। तोमर ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के कुछ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के माध्यम से किसानों को संदेश दिया। तोमर ने यह भी बताया कि फसलों की कटाई ना रुके इसीलिए मंत्रालय ने मशीनों को एक राज्य से दूसरी राज्य तक जाने की अनुमति दे दी है। कोरोना महामारी के चलते देश के किसानों के हितों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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