सज्जन की ‘दुर्जन’ भाषा, सिंधिया पर आरोप जड़ते भूले शब्दों की मर्यादा

सज्जन की ‘दुर्जन’ भाषा, सिंधिया पर आरोप जड़ते भूले शब्दों की मर्यादा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-election) की तैयारियां शुरू हो गई है और इसी के साथ शुरू हो गए हैं जुबानी हमले भी। बीजेपी और कांग्रेस नेता एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं और इसी दौरान ऐसे बयान भी सामने आ रहे हैं जिनमें भाषा की मर्यादा भी पार हो रही है।

भाजपा (BJP) में जाने के बाद से खामोश बैठे राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने एक तरफ अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, वहीं कांग्रेस उनपर जमकर हमला बोल रही है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (sajjan singh verma) ने अपने एक बयान में सिंधिया की आलोचना करते करते भाषा की मर्यादा भी भूल गए। सज्जन वर्मा ने कहा कि “ज्योतिरादित्य सिंधिया बड़े तामझाम के साथ कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंचे, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय बंगाल भाग गए और सिंधिया बाबू ने वहा नकटे सरीखे बैठकर भोजन किया। मैंने कैलाश को धकमाकर दादागिरी से वोटिंग कराई थी वरना उनके परदादा भी नहीं जीत पाते। और अब सिंधिया नकटे जैसे उनके घर जा रहे हैं और वो बंगाल भाग गया।” सज्जन वर्मा ने अपने बयान में कहा कि राजनीतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, लेकिन इसी दौरान वे भूल गए कि उनके इस बयान में भाषा का भी ह्रास हो रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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