भोपाल में खुली दुकानें, सरकार और व्यापारियों के बीच सेतु बना यह युवा नेता

भोपाल में खुली दुकानें, सरकार और व्यापारियों के बीच सेतु बना यह युवा नेता

भोपाल

भोपाल (bhopal) में बुधवार से लॉकडाऊन (lockdown 4) को ध्यान में रखते हुए कई मार्केट (market) खोल दिये गए हैं। कलेक्टर (collector) तरुण पिथोड़े (tarun pithode) द्वारा जारी की गई गाइडलाइन (guideline) के अनुसार अलग-अलग दुकानें अलग-अलग जगहों पर नियत दिनों में पर खुलेंगी। बैरागढ़ में सप्ताह में दो दिन और शेष जगह पर सप्ताह में एक दिन अवकाश जरूरी होगा। इसके साथ साथ सभी दुकानदारों को कोरोना का ध्यान रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग और तमाम एहतियातो का पालन करना होगा ।

62 दिन बाद बाजार गुलजार होने पर व्यापारियों ने मुख्यमंत्री (chief minister) और प्रदेश के गृह व स्वास्थ्य मंत्री (home and health minister) डॉ नरोत्तम मिश्रा (dr.narottam mishra) का आभार प्रकट किया है। फिलहाल इन बाजारों के खुलने का समय सुबह 11:00 से शाम 5:00 बजे तक नियत किया गया है। व्यापारियों ने इस पूरी कवायद में बीजेपी bjp के युवा नेता और प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी (durgesh keswani) का विशेष आभार माना है क्योंकि दुर्गेश लगातार दुकानदारों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते रहे और उनके हल के लिए प्रयास करते रहे। दुर्गेश ने प्रधानमंत्री (prime minister) के ‘जान के साथ जहान भी है’ नारे को न केवल सरकार तक पहुंचाया बल्कि सरकार को व्यापारियों की ओर से कोरोना रोकथाम के हर संभव कोशिश का ठोस आश्वासन भी दिया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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