हाथ ठेले पर सामान लादकर इंदौर से भोपाल पहुंचा परिवार, 7 दिन में तय किया रास्ता

हाथ ठेले पर सामान लादकर इंदौर से भोपाल पहुंचा परिवार, 7 दिन में तय किया रास्ता

भोपाल

लॉकडाउन (lockdown) के इस कठिन समय में इंदौर (indore) में रह रहा भोपाल (bhopal) का एक परिवार (family) हाथ ठेले पर सवार होकर इंदौर से भोपाल पहुंचा है। दरअसल सोमवार को एक व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्ची के साथ ठेले पर बैरागढ़ (bairagarh) की सीमा पर मिला जिसे पुलिस (police) ने तत्काल क्वारेंटाइन किया।पूछताछ पर पता चला कि व्यक्ति इंदौर में सब्जी बेचा करता था और बैरागढ़ में उसकी मां रहती है। पिछले दो महीने से वह घर से दूर था और उसकी मां को उसकी बहुत चिंता हो रही थी। इंदौर में सब्जी का ठेला लगाने वाले इस व्यक्ति की रोजी रोटी लॉकडाउन में बंद हो गई थी और ऐसे में उसके पास घर लौटने के सिवा कोई चारा न बचा था। आवागमन का कोई साधन न होने के कारण वो व्यक्ति 4 मई को भोपाल के लिए निकला, हाथ ठेले पर सामान लादकर ये परिवार इंदौर से भोपाल पैदल पहुंचा है।

हाथ ठेले से निकला ये शख्स रास्ते में कई जगह ढाबे पर रुका और ढाबा संचालकों ने उसे खाना खिला कर उसका और उसके परिवार का पेट भरा। सोमवार को वह दोपहर में भोपाल पहुंच गया। यानी सात दिन के सफर के बाद उसे उसका मुकाम मिल गया। हालांकि अभी उसे मां से मिलने के लिए 14 दिन का क्वारेंटाइन पूरा करना पड़ेगा, लेकिन सुकून यह है कि वह अब अपने शहर में आ गया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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