उपचुनाव से पहले एक और मास्टरस्ट्रोक लगाने की तैयारी में सरकार

उपचुनाव से पहले एक और मास्टरस्ट्रोक लगाने की तैयारी में सरकार

भोपाल।
नगरीय निकाय और उपचुनाव से पहले एक बार फिर प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने आदिवासियों को साधना शुरु कर दिया है। अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए सरकार लगातार आदिवासियों पर फोकस कर रही है। अब सरकार ने स्कूलों के कोर्स में आदिवासी बोलियों को शामिल करने का फैसला किया है।आगामी चुनावों से पहले इसे सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

दरअसल, मध्यप्रदेश के आदिवासियों को लेकर कमलनाथ सरकार ने बड़ा फैसला किया है। जिसके तहत अब स्कूलों में आदिवासी बोलियों की पढ़ाई होगी। सरकार आदिवासियों की तीन बोलिया भीली, कोरकू और गोंडी को स्कूली पाठयक्रम में शामिल करेगी। इसके तहत प्रदेश सरकार 89 आदिवासी ब्लॉक में बोलियां पढ़ाने का काम करेगी ।स्कूल शिक्षा विभाग जो प्रस्ताव तैयार कर रहा है उसके अनुसार इन बोलियों का अलग से पाठयक्रम होगा और इन्हें तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा।विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी वर्किंग ग्रुप को सौंपी है। माना जा रहा है नए शिक्षण सत्र से सरकार इसे अमल में ला सकती है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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