गृहमंत्री ने गुना हादसे पर जताया दुख, कहा- “घायलों का इलाज करा रही है मध्यप्रदेश सरकार”

गृहमंत्री ने गुना हादसे पर जताया दुख, कहा- “घायलों का इलाज करा रही है मध्यप्रदेश सरकार”

भोपाल

गुना में 8 मजदूरों की मृत्यु पर गृह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दुख जताते हुए कहा है कि ये दर्दनाक हादसा है, यूपी सरकार मजदूरों के परिवार को दो लाख की सहायता राशि की घोषणा कर चुकी है। घायलों का इलाज मध्य प्रदेश सरकार करा रही है। उन्होने कहा कि मजदूरों की हरसंभव मदद की जाएगी।

वहीं कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अब हमें इसे लाइफ स्टाइल में शामिल करना पड़ेगा। कोरोना के 95 फीसदी मरीज बीमारी से ठीक हो जाते है , मरीज 3 दिन के अंदर अस्पताल पहुंच जाए तो। हमें सावधानियां बरतनी पड़ेंगी, कोरोना संक्रमित मरीज़ों से भी आप सावधानी बरतते हुए मिल सकते हैं और उनसे अवांछित रूप से दूरियां बनाना समाज में नकारात्मकता को बढ़ावा दे रहा है जो सामाजिक रुप से ठीक नहीं है।

जहांगीराबाद के लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के प्रश्न पर उन्होने कहा कि लोगों को क्वॉरेंटाइन करने का सबसे अच्छा स्थान उनका घर होता है। ऐसे लोगों के उपचार के लिए समुचित प्रबंध करेंगे । दवाइयां उनके घर तक पहुंचाई जाएगी और चिन्हित लोगों को उनके घरों में ही क्वॉरेंटाइन किया जाएगा ।

वहीं पेरोल को लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पेरोल की अवधि 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन की गई हैं। अंतरिम जमानत की अवधि 45 दिन से बढ़ाकर 90 दिन की गई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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