NHM संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी डॉक्टर मामले पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग

उन्होंने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि इससे लाखों मरीजों की जान खतरे में पड़ी है। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, स्वास्थ्य विभाग की नियुक्तियों की समीक्षा करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
Leader of the Opposition Umang Singhar

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब फर्जी डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। भोपाल सहित प्रदेश के अन्य सरकारी संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी डिग्री और पंजीयन वाले लोगों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आने के बाद उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही से आगे का भ्रष्टाचार और संरक्षण का खेल बताया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि “भाजपा सरकार के राज में मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब फर्जी डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। भोपाल की सरकारी संजीवनी क्लीनिकों में ऐसे लोगों द्वारा इलाज किए जाने का मामला सामने आया है, जिनके मेडिकल रिकॉर्ड, डिग्री और पंजीयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लाखों मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।”

क्या है मामला

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित कुछ संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी MBBS डिग्री और जाली मेडिकल काउंसिल पंजीयन के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया। जांच में खुलासा हुआ कि कुछ आरोपी करीब एक वर्ष तक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और संजीवनी क्लीनिकों में डॉक्टर बनकर मरीजों का उपचार करते रहे। दमोह जिले की सुभाष कॉलोनी संजीवनी क्लीनिक में तीन फर्जी डॉक्ट कुमार सचिन यादव, राजपाल गौर और अजय मौर्य पकड़े गए। पुलिस ने दमोह से दो और जबलपुर से एक को गिरफ्तार किया। इनके सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।

भोपाल में भी एनएचएस के तहत नौ फर्जी डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की गई है। ये लोग भी फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे थे। एनएचएम ने सभी फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी है। वही पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है। जांच के दौरान एमएचएम भोपाल से एक आईटी सहायक को भी गिरफ्तार किया गया, जिसपर नियुक्ति प्रक्रिया और पोर्टल पर आदेश अपलोड करने में भूमिका होने के आरोप हैं।

उमंग सिंघार ने सीएम से की जांच की मांग  

उमंग सिंघार ने इस मामले पर कहा है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लाखों मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सामान्य सत्यापन में पकड़ में आने वाली गड़बड़ियां वर्षों तक सामने नहीं आईं तो क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार और संरक्षण का खेल चल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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