उमरिया के आदिवासी गांव में 5 साल बाद भी नहीं पहुंची बिजली, उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा “क्या यही बीजेपी का विकास मॉडल है”

बाघन्नारा गांव में बैगा आदिवासी परिवार वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। गांव में बिजली का ढांचा तैयार होने के बावजूद अब तक आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इस मुद्दे को उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर चिंता जताई। है। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
Umang Singhar Opposition Leader

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने उमरिया जिले के आदिवासी क्षेत्र में बिजली सुविधा नहीं पहुंचने को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित प्रदेश में उमरिया जिले के ग्राम पंचायत चांदपुर अंतर्गत बाघन्नारा गांव के करीब 100 बैगा परिवार आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि पांच साल पहले गांव में बिजली के खंभे और तार लगा दिए गए थे लेकिन अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है और ग्रामीणों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से बिजली विभाग और प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

आदिवासी गांव में बिजली का इंतज़ार

उमरिया जिले के पाली विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदपुर के बाघन्नारा गांव में पांच साल पहले*बिजली के खंभे और तार लगाए गए थे, लेकिन आज तक यहां बिजली नहीं पहुंची है। उमंग सिंघार का आरोप है कि यहां रहने वाले लगभग 100 बैगा परिवार दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि ‘5 साल पहले खंभे और तार लगा दिए गए, लेकिन आज तक बिजली की एक किरण भी नहीं पहुँची। दो दशकों से अधिक समय से सत्ता में बैठी भाजपा सरकार प्रदेशवासियों को मूलभूत सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं करा पा रही, क्या यही बीजेपी तथाकथित “विकास मॉडल” है?’

उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि बीजेपी द्वारा चुनावी मंचों पर किए गए वादे खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली, पानी और सम्मान जनता का अधिकार है..कोई एहसान नहीं। उमंग सिंघार ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकार की विफलता का प्रमाण है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वन विभाग की आपत्तियों और अन्य प्रशासनिक कारणों से भी इलाके के कई गांवों में बिजली कनेक्शन में बाधा आ रही है। पिछले कुछ समय से उमंग सिंघार प्रदेश में बिजली दरों, स्मार्ट मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति जैसे मुद्दों पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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