बेटियों के वाहनों में लगाए जाएंगे पैनिक बटन, संकट के समय 10 से 15 मिनट में पहुंच जायेगी पुलिस

बेटियों के वाहनों में लगाए जाएंगे पैनिक बटन, संकट के समय 10 से 15 मिनट में पहुंच जायेगी पुलिस

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| बेटियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने और बेटियों को सुरक्षित माहौल देने सरकार कई बड़े फैसले ले रही है| किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अब लड़कियों के वाहनों में पैनिक बटन (Panic Button) लगाए जाएंगे। इस बटन को दबाते ही पुलिस (Police) को इसकी जानकारी तुरंत मिल जायेगी| राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर दतिया में गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने यह एलान किया|

राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर रविवार को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया में महिला बाल विकास विभाग और मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आयोजित महिला सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी बेटियों के वाहनों में अब पैनिक बटन लगाया जाएगा। इसे पुलिस के डायल 100 नंबर से जोड़ा जाएगा। जिससे उन्हें संकट के समय 10 से 15 मिनट में पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से पैनिक बटन लगाने का काम किया जाएगा|

26 जनवरी को जेल से रिहा होंगे 183 बंदी
गृहमंत्री डॉ मिश्रा ने कहा गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेश की विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 183 बंदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया है। सजा में छूट के इन मामलों में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट का कोई भी बंदी शामिल नहीं किया गया है। इस दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नशा मुक्ति के लिए चलाए गए नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि लोगों में नशे के प्रति जागरुकता सृजित करने के लिए यह कार्यक्रम निश्चित रूप से लाभदायक होगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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