पूर्व मंत्री का कांग्रेस पर तंज- घर का लड़का बागी हुआ तो दूसरे पर दोष क्यों, बाप चिंता करे

पूर्व मंत्री का कांग्रेस पर तंज- घर का लड़का बागी हुआ तो दूसरे पर दोष क्यों, बाप चिंता करे

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने कांग्रेस के बयानों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनके घर का लड़का बागी हो रहा है तो बाप ये चिंता करे कि ऐसा क्यों हो रहा है, दूसरे पर दोष क्यों दे रहे हो। उन्होंने कहा कि उनकी जो चौकियाँ ध्वस्त हो गई वो अब हमारे कब्जे में हैं । जिसे कोई नहीं छुड़ा सकता।

कांग्रेस के विधायकों द्वारा पार्टी और विधायकी छोड़ने के लिए पार्टी भाजपा को दोष दे रही है और खरीद फरोख्त के आरोप लगा रही है। कांग्रेस के आरोपों का पूर्व मंत्री एवं भाजपा के तेज तर्रार नेता अनूप मिश्रा ने जवाब दिया है। ग्वालियर में चुनिंदा पत्रकारों से बात करते हुए अनूप मिश्रा ने कहा कि युद्ध युद्ध ही होता है और युद्ध की तरह ही लड़ा जाता है। हम चुनाव को युद्ध की तरह ही लड़ रहे हैं। उनकी कुछ चौकियाँ ध्वस्त हो गई जिनपर अब हमारा कब्जा है। उन चौकियों को अक्षुण्ण रखने के लिए ही ये युद्ध हो रहा है। वो अपना कब्जा वापस चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स नहीं है। कोई कमांडेंट नहीं है। वे किसको सामने लाकर चुनाव लडायेंगे? उन्हें पता ही नहीं है।

कांग्रेस द्वारा भाजपा को डरी हुई बताकर उनके विधायक तोड़ने के आरोप का जवाब देते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि ये चिंता तो दल को अपनी अपनी करनी चाहिए। घर का लड़का बागी हो रहा है तो ये बाप को चिंता करनी थी। दूसरे को दोष क्यों दे रहे हो कि घर छोड़कर चला गया। अब जब वो घर छोड़कर जायेगा तो कहीं तो वो रोटी खायेगा ना वो। तो उसे लगा कि इनके यहाँ रोटी ठीक मिलेगी तो वो यहाँ आ गया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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