लॉक डाउन के बीच रामायण का प्रसारण दोबारा शुरू, ऐसा रहा लोगों का रिएक्शन

लॉक डाउन के बीच रामायण का प्रसारण दोबारा शुरू, ऐसा रहा लोगों का रिएक्शन

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

दूरदर्शन पर शुरू हुई रामायण ने लोगों को एक बार फिर धार्मिक आस्था को जगा दिया। कोरोना की संकट की घड़ी में रामायण का दोबारा डीडी नेशनल पर शुरू होना लोगो की धार्मिक आस्था को फिर से जगा। इंदौर में तो लोगो ने उस दौर के अंदाज में बकायदा टीवी की पूजा कर रामायण को देखा वही बच्चो के लिए भी रामायण परिवार के साथ देखना एक नया और अविस्मरणीय अनुभव रहा। 1987 के दौर में जब रामायण शुरू होती थी तो सड़कें खाली हो जाती थी वही आज सड़कें खाली है इसलिए सरकार ने रामायण को शुरू कर दिया। वही लोग भगवान से कोरोना के कहर को थामने की प्रार्थना भी रामायण के जरिये करते दिखाई दिए।

जाने ये खास बातें रामायण के बारे में

रामायण एक बहुत ही सफ़ल भारतीय टीवी श्रृंखला है, जिसका निर्माण, लेखन और निर्देशन रामानन्द सागर के द्वारा किया गया था। ७८-कड़ियों के इस धारावाहिक का मूल प्रसारण दूरदर्शन पर 25 जनवरी, 1987 से 31 जुलाई 1988 तक रविवार के दिन सुबह ९:३० किया जाता था। हाल ही कपिल शर्मा के शो में आये अरुण गोविल, दीपिका, सुनील लहरी और रामानन्द सागर के बेटे प्रेम सागर आये थे और उन्होंने टीवी पर प्रसारित किए गए रामायण सीरीज के अपने अनुभव साझा किए थे। जानकारी के लिए बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने ट्वीट कर बताया है कि सीरियल का पहला एपिसोड सुबह 9 बजे और दूसरा एपिसोड रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा। जिसकी शुरुआत आज से हो गई है। बता दे कि रामायण का टेलिकास्ट दूरदर्शन पर 25 जनवरी 1987 में शुरू हुआ था। उन दिनों दूरदर्शन भारत में चलने वाला एकमात्र टेलिविजन चैनल था।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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