सीमेंट क्रांकीट मिक्सर में छिपकर जा रहे मजदूर पकड़ाए, पुलिस ने ऐसे निकाला बाहर

सीमेंट क्रांकीट मिक्सर में छिपकर जा रहे मजदूर पकड़ाए, पुलिस ने ऐसे निकाला बाहर

इंदौर।आकाश धोलपुरे। केंद्र सरकार(central government) और अलग अलग राज्य सरकारों द्वारा मजदूरों(laborers) को घरों तक पहुंचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए है लेकिन बावजूद इसके लोग अपने शहर और घर तक पहुंचने की चाह में अपनी जान को ना सिर्फ कोरोना(corona) के खतरे में डाल रहे है बल्कि खुद की मौत की इबारत लिखने पर आमदा है। अपनी जान को ना सिर्फ कोरोना के खतरे में डाल रहे है बल्कि खुद की मौत की इबारत लिखने पर आमदा है। इंदौर में लोगो द्वारा हद को पार खुद की जान तपती गर्मी में डालने वाला एक वीडियो सामने आया है। जिसमे सीमेंट क्रांकीट के मिक्सर में बैठकर तकरीबन 18 लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर खुद को मौत के मिक्सर में डाल बैठे।

हकीकत में तस्वीरे शहर के एक चैकिंग पाइंट की है जहां पुलिस की सतर्कता के चलते एक बड़ा खुलासा हुआ है। ताजा तस्वीरों की, जो सच्चाई सामने आई है उसके मुताबिक सीमेंट क्रांकीट के मिक्सर मैं बैठकर 18 लोग महाराष्ट्र से उत्तरप्रदेश के लखनऊ जा रहे थे। इंदौर ट्रैफिक डीएसपी उमाकांत चौधरी ने बताया कि बड़ी बेदर्दी से लोगो को महाराष्ट्र से लखनऊ ले जाया जा रहा था और उज्जैन रोड पर चैकिंग पाइंट पर ट्रैफिक सूबेदार अमित यादव ने पूछताछ कर ट्रक को रुकवाया। पूछताछ में पता चला कि ट्रक महाराष्ट्र से लखनऊ जा रहा है और को व्यक्तियों को मिक्सर कंटेनर के अंदर से एक एक कर निकलवाया गया। मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने वाहन और ड्रायवर पर कार्रवाई कर सांवेर थाने में मामला दर्ज करवाया और पलायन करने वाले 18 लोगो को क्वारन्टीन सेंटर पहुंचाया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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