Bank FD: ग्राहकों को होगा अब ज्यादा मुनाफा, इस सरकारी बैंक ने बढ़ा दिया एफडी पर ब्याज, इतनी हैं नई दरें

bank fd

Bank FD:  रेपो रेट में कोई बदलाव ना होने के बावजूद कई बैंकों ने इन दिनों एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों में इजाफा किया है। कई बैंक तो ऐसे हैं जो फिक्स्ड डिपॉजिट पर 9.5 फीसदी से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने हाल ही में Fixed Deposit के ब्याज दरों में वृद्धि कर दी है। यह देश के मुख्य पब्लिक सेक्टर बैंक में से एक है। 2 करोड़ से कम वाली एफडी के ब्याज दरों में 30bps की वृद्धि की गई है। नए रेट्स प्रभावी भी हो चुके हैं।

वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम 7.75 फीसदी तक का ब्याज मिल रहा है। 399 दिनों वाली तिरंगा प्लस डिपॉजिट स्कीम पर 7.25 फीसदी का ब्याज दिया जा रहा है। इस योजना पर वरिष्ठ नागरिक 7.75 फीसदी ब्याज का लाभ उठा सकते हैं। 2 साल से लेकर 3 साल की एफडी पर समान्य ग्राहकों को बैंक 7.05 फीसदी ब्याज ऑफर कर रहा है। 3 साल से लेकर 5 साल की स्कीम पर समान्य नागरिकों को 6.5 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों को 7.15 फीसदी इंटरेस्ट मिल रहा है।

समान्य नागरिकों को 7-14 दिनों और 15-45 दिनों की एफडी पर 3 फीसदी मिल रहा है। 46-90 दिनों की एफडी पर 4.5 फीसदी इंटरेस्ट मिल रहा है। सामान ब्याज 91-180 दिनों की फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहा है। 1 साल से लेकर 400 दिनों की एफडी पर 5.75 फीसदी ब्याज मिल रहा है, इस स्कीम पर वरिष्ठ नागरिक 7.25 फीसदी ब्याज का लाभ उठा सकते हैं। वहीं 400 दिन से लेकर 2 साल की FD पर समान्य ग्राहकों को 6.75 फीसदी ब्याज का लाभ मिल रहा है। 5 साल से लेकर 10 साल की एफडी पर समान्य नागरिकों के लिए ब्याज दर 6.25 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.50 फीसदी है।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews