
भारतीय शेयर बाजार में बीता हफ्ता बेहद परेशानी वाला रहा। 22 सितंबर से 26 सितंबर तक शेयर निवेशकों के लिए बुरे दिन दिखाई दिए। शेयर बाजार में पिछले 5 दिनों में ही निवेशकों के 16 लाख करोड़ रुपए खत्म हो गए। शुक्रवार की ही बात की जाए तो लगभग 7 लाख करोड़ रुपए का नुकसान निवेशकों को झेलना पड़ा है। शुक्रवार के दिन सेंसेक्स में बड़ी गिरावट देखी गई। शुक्रवार को सेंसेक्स 733.22 अंक टूटकर 80426 के स्तर पर बंद हुआ।
वहीं निफ्टी की बात की जाए तो निफ्टी ने हफ्ते के आखिरी दिन 236.15 अंकों की गिरावट लेकर 24654 के स्तर पर अपना कारोबार बंद किया। बीते हफ्ते ही निफ्टी में लगभग 2587 अंकों की गिरावट देखी गई। यह भारतीय शेयर निवेशकों के लिए किसी बुरे समय से कम नहीं रहा।
क्यों दिखाई दी इतनी बड़ी गिरावट?
सबसे बड़ा सवाल है कि भारतीय शेयर बाजार में यह गिरावट क्यों दिखाई दे रही है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना ऐलान किया था। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H1B वीजा के लिए फीस बढ़ाने का ऐलान किया गया था। इसके बाद से ही आईटी स्टॉक्स लगातार दबाव में हैं। बाहर नौकरी कर रहे भारतीय व्यक्तियों के लिए यह खबर हलचल पैदा करने वाली रही। इससे कई कंपनियों को नुकसान हुआ। निफ़्टी आईटी शुक्रवार को सबसे ज्यादा गिरावट झेलने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा टीसीएस, एचसीएल टेक, इंफोसिस जैसी कंपनियां भी गिरावट के साथ बंद हुईं। शुक्रवार के दिन निफ़्टी आईटी इंडेक्स में 8% से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
यह भी है एक कारण
इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने और भी कई बड़े फैसले लिए हैं। ट्रंप की ओर से 1 अक्टूबर से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की गई है। अब इस फैसले के चलते भारत की फार्मास्युटिकल कंपनियां भी घाटे का दौर झेल रही हैं। सन फार्मा, लूपिन, अरविंदो फार्मा और सिप्ला जैसी भारतीय कंपनियों को शुक्रवार को 10% से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा। डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा निर्णय है कि टैरिफ के दायरे में जेनेरिक दवाइयों को भी लाया जाएगा। इनमें फार्मा कंपनियों का बड़ा हिस्सा है, जिससे गिरावट देखी गई। उधर डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर अब 88 के आसपास पहुंच चुका है।
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