रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जून में एक और सहकारी बैंक के खिलाफ सख्ती दिखाई है। कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित महिला को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 5 लाख का जुर्माना लगाया गया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया है। इस कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने 15 जून को अपने आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है। जुर्माने से संबंधित आदेश बैंक कोई 11 जून को जारी किया गया था।
बैंक की वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए आरबीआई ने 31 मार्च 2025 तक एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में कमियों का पता चला। जांच की रिपोर्ट के आधार पर बैंक को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। इस पर मिली प्रतिक्रिया व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों पर विचार किया गया। आरोप सही साबित होने जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
इस बैंक ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए हैं, जो बैंकिंग नियमों के खिलाफ है। नियमों के तहत बैंक निदेशक उनसे जुड़े रिश्तेदार, संबंधित फॉर्म/कंपनी को लोन या एडवांस नहीं दे सकते। ऐसे लोन को भी स्वीकृत नहीं किया जा सकता, जहां निदेशक गारंटर, पार्टनर या मैनेजर के तौर पर रहते हैं।
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
आरबीआई की इस कार्रवाई का असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे थे किसी भी लेनदेन पर नहीं पड़ेगा। ग्राहक सभी सेवाओं का लाभ पहले की तरह ही उठा पाएंगे। इस बात की पुष्टि सेंट्रल बैंक में खुद की है। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने कहा कि, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक और ग्राहक के बीच हो रहे हैं किसी भी ट्रांजैक्शन या एग्रीमेंट की वैधता को प्रभावित करना नहीं है।” भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
जून में अब तक आरबीआई कई बैंकों के खिलाफ नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कदम उठा चुका है। इस लिसर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड हरियाणा, अमरावती मर्चेंट्स सहकारी बैंक लिमिटेड (महाराष्ट्र), केनरा बैंक और नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराजगंज (यूपी) शामिल हैं।






