SSC Exam 2025: भर्ती परीक्षाओं के लिए बदली नार्मलाइजेशन प्रक्रिया, जानें क्या है नया फार्मूला ,उम्मीदवारों को कैसे मिलेगा लाभ

नॉर्मलाइजेशन इक्वीपर्सेंटल सिस्टम के अंतर्गत हर शिफ्ट में उम्मीदवार की रैंक और पर्सेंटाइल तय की जाएगी।इस नए सिस्टम से सबको बराबर का मौका मिलेगा।
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SSC Recruitment Exam : उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। कर्मचारी चयन आयोग ने परीक्षाओं में अपनाई जाने वाली नार्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया है।इसके तहत अब उम्मीदवारों की तुलना उनकी शिफ्ट के आधार पर पर्सेंटाइल से की जाएगी। खासकर उन परीक्षाओं में, जो कई शिफ्टों में आयोजित की जाती हैं, अब उम्मीदवारों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन इक्वीपरसेंटाइल (Equi-percentile) मेथड से किया जाएगा। इससे परीक्षा में निष्पक्षता और पारदर्शिता आएगी।

पहले क्या थी नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया

अबतक एसएससी हर शिफ्ट के टॉप स्कोर और एवरेज नंबर देखता था, फिर उसी हिसाब से सभी को नंबर दिए जाते थे। इसमें अगर आपकी शिफ्ट थोड़ी मुश्किल आ गई, तो नंबर कम हो जाते थे लेकिन आसान शिफ्ट होने पर नंबर बढ़ जाते थे। इस प्रक्रिया से छात्रों को परेशानी होती थी और उन्हें लगता था कि उनके साथ गलत हुआ है।

क्या है नई नार्मलाइजेशन की प्रक्रिया

नई प्रक्रिया के तहत, औसत और अंकों में अंतर से हटकर, उम्मीदवारों की संबंधित शिफ्टों में उनकी रैंक या पर्सेंटाइल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो अब ‘नंबर’ सीधे एडजस्ट नहीं होंगे बल्की अब ‘रैंक’ या ‘परसेंटाइल’ पर ध्यान दिया जाएगा। यानि अपनी ही शिफ्ट में बाकी स्टूडेंट्स के मुकाबले कैसा परफॉर्म किया इसको महत्वता दी जाएगी। इससे गलत रैंकिंग नहीं होगी और मुश्किल पेपर देने वाले छात्रों को भी बराबरी से लाभ मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, एक शिफ्ट में 80 प्रतिशत परीक्षार्थियों से बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवार को दूसरी शिफ्ट में 80% परीक्षार्थियों से बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवार के बराबर माना जाएगा।

SSC Exams 2025: अभ्यर्थियों को क्या मिलेगा फायदा

सभी शिफ्ट के उम्मीदवारों को बराबरी का मौका ।
किसी भी शिफ्ट में कठिन प्रश्न आने पर नुकसान नहीं।
कठिन सवाल पर भी रैंक के हिसाब से ही नंबर
परीक्षा परिणाम अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष ।

SSC Notification

https://ssc.gov.in/api/attachment/uploads/masterData/NoticeBoards/Notice_10092025.pdf

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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