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ईको-फ्रेंडली गणेश से सजे ग्वालियर में बाजार, मिट्टी के गणपति के प्रति बढ़ा आकर्षण, ढोल नगाड़ों के साथ हो रही स्थापना

घरों में गणेश मूर्ति की स्थापना के अलावा ग्वालियर के बड़े बड़े मंदिरों के पास भी गणपति की स्थापना होती है, अचलेश्वर मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, राम मंदिर आदि स्थानों के पास स्थापित की जाने वाली बड़ी मूर्तियाँ शहर के आकर्षण का केंद्र होती हैं।
Gwalior Ganesh Chaturthi Eco friendly Ganesh

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प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना का पर्व गणेशोत्सव आज गणेश चतुर्थी से शुरू हो गया, 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व के लिए पूरे देश की तरह ही ग्वालियर में भी बाजार सज गए हैं, शहर में अलग अलग जगह गणेश मूर्तियों की दुकानें सजी है लेकिन मुख्य बाजार थीम रोड कटोराताल रोड पर है जहाँ भीड़ पहुंच रही है और अपने मनपसंद बप्पा को घर ले जा रहे हैं।

पीओपी की मूर्तियों पर रोक के चलते मिट्टी की मूर्तियों की तरफ आकर्षण बढ़ा है, पर्यावरण की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन भी मिट्टी की मूर्तियों के प्रति जागरूक कर रहा है ग्वालियर के बाजार में भी ये असर दिखाई दे रहा है, बाजार में बैठे दुकानदार मिट्टी की 5 इंच ऊँची मूर्ति से लेकर कई फीट ऊँची मूर्तियाँ लेकर बैठे हैं, लोग अपनी पसंद के हिसाब से मूर्ति चुनकर ले जा रहे हैं।

ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति के साथ विसर्जन पात्र भी 

कटोरा ताल मुख्य बाजार में मिट्टी की मूर्तियों के साथ ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियाँ उपलब्ध हैं, दुकानदार मूर्ति के साथ घर में ही विसर्जन के लिए एक पात्र (प्लास्टिक का गमला) और पौधे के बीज भी साथ में बेच रहे हैं, जिससे गणेश विरजन के बाद गमले में बची मिट्टी में ये बीज डाल दिए जाएँ और जो पौधा उसमें ऊगे वो गणपति के  रूप में उनकी याद दिलाये।

शुद्ध मिट्टी से बनी मूर्तियाँ लोगों के आकर्षण का केंद्र

शुद्ध मिट्टी से बनी ये मूर्तियाँ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, लोगों की डिमांड को देखते हुए पिछले वर्षों की तुलना में इस साल इस तरह की दुकानों की संख्या बढ़ गई है। विसर्जन को लेकर बढ़ रही जागरूकता के कारण लोग अब घर में विसर्जन की तरफ बढ़ रहे हैं जिससे इस तरह के दुकानदारों की बिक्री में वृद्धि हुई है।

गणपति बप्पा की भक्ति में डूबा ग्वालियर 

दुकानों पर काली मिट्टी की मूर्तियों के साथ कलर की हुई मूर्तियाँ भी उपलब्ध हैं, अधिकतर लोग टू व्हीलर और कार से घर में स्थापना के लिए छोटी मूर्तियाँ लेने पहुंच रहे हैं लेकिन जिन्हें सार्वजनिक रूप से प्रतिमा स्थापित करनी है या फिर बड़ी मूर्ति  स्थापित करनी है वे एक लोडिंग वाहन के साथ पहुंच रहे हैं और बप्पा को ढोल नगाड़ों के साथ ले जा रहे हैं। कुल मिलकर ग्वालियर शहर इस समाया गणपति बप्पा की भक्ति में रमा हुआ है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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ईको-फ्रेंडली गणेश से सजे ग्वालियर में बाजार, मिट्टी के गणपति के प्रति बढ़ा आकर्षण, ढोल नगाड़ों के साथ हो रही स्थापना