मुख्यमंत्री राज्यपाल आमने सामने, राष्ट्रपति शासन के बढे आसार

मुख्यमंत्री राज्यपाल आमने सामने, राष्ट्रपति शासन के बढे आसार

भोपाल।

एमपी में हालत दिनों दिन बिगड़ते जा रहे है। फ्लोर टेस्ट को लेकर अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री कमलनाथ आमने सामने हो गए है।सीएम कमलनाथ ने फिर राज्यापल को पत्र लिखा है ।सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा कि, 40 वर्ष के राजनीतिक जीवन में कभी मुझ पर पहली बार संसदीय मर्यादाओं का पालन ने करने का आरोप लगा है। इसस मैं दुखी हूं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, यदि आपको ऐसा लगा तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। पत्र में सीएम ने साफ किया कि कोरोना वायरस अलर्ट के चलते विधानसभा का सत्र तुरंत स्थगित करना पड़ा। 15 महीनों में कई बार मैं अपना बहुमत साबित कर चुका हूं। विपक्ष अगर चाहता है तो अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। कांग्रेस के 16 विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखा गया है, उनके आए बिना बहुमत साबित कराना असंवैधानिक होगा।

दरअसल, रविवार को राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाने को कहा था। लेकिन सोमवार को हंगामे के बाद विधानसभा २६ मार्च तक स्थगित कर दी । इसके बाद राज्यपाल ने सोमवार शाम को दूसरी बार पत्र लिखकर कमलनाथ को मंगलवार को ही बहुमत साबित करने को कहा। लेकिन सरकार ने नही कराया और राज्यपाल की चिट्टी का कमलनाथ ने मंगलवार को जवाब भी चिट्ठी से ही भेजा। कमलनाथ ने कहा कि राज्यपाल का 17 मार्च को ही बहुमत साबित करने का आदेश असंवैधानिक है। उधर, राज्यपाल के आदेश के बावजूद स्पीकर के फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने के खिलाफ भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर से 24 घंटे में जवाब मांगा है। मामले में बुधवार को भी सुनवाई होगी।
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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