अब मंत्री ब्रजेंद्र यादव का महिलाओं को साड़ी बांटते वीडियो वायरल, मचा हड़कंप

Brijendra Yadav

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  उपचुनाव के चलते मध्यप्रदेश  में आचार संहिता लागू है, ऐसे में वायरल वीडियो और नेताओं द्वारा नियमों के उल्लंघन की खबरें मीडिया (Media) में सुर्खियां बन रही है।शिवराज सरकार में मंत्री और अनूपपूर से संभावित BJP प्रत्याशी बिसाहूलाल सिंह (Bisahulal Singh) के वायरल वीडियो का मामला अभी शांत भी नही हुआ था कि अब मंत्री और मुंगावली से BJP संभावित उम्मीदवार ब्रजेंद्र यादव (Brijendra Yadav) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी के साथ वायरल हो रहा हैं, जिसमें वो महिलाओं को साड़ी बांटते हुए नज़र आ रहे हैं। वीडियो वायरल (Video Viral) के बाद हड़कंप मच गया है, कांग्रेस ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है और चुनाव आयोग में शिकायत की बात कही है।

दरअसल, यह वीडियो एमपी कांग्रेस (MP Congress) ने अपने ट्वीटर हैंडल पर शेयर किया है।कांग्रेस ने इस पर तंज भी कसा है और लिखा है कि प्रचार में 35 करोड़ दिखने लगा, बीजेपी प्रत्याशी साड़ी बाँट रहे है। सोमवार को बीजेपी के बिकाऊ लाल का 100 और शाम को 500 का नोट बाँटने के वीडियो वायरल होने के बाद अब दूसरे बैंगलोर रिटर्न मंत्री ब्रजेन्द्र यादव साड़ी बांट रहे हैं।ये बिकाऊ लोग नेता नहीं हैं, ये लोकतंत्र के स्थाई कलंक हैं। वही कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा (Narendra Saluja) ने लिखा है कि मूंगावली के पूर्व विधायक , मंत्री ब्रजेंद्र यादव इस वायरल वीडियो में मतदाताओं को साड़ी बाँट रहे है। कोई नोट , कोई कलश , कोई साड़ी बाँट रहा है। कांग्रेस चुनाव आयोग को शिकायत करेगी । डील के करोड़ों रुपये बाहर आ रहे है।

बता दे कि दो दिन पहले मंत्री बिसाहूलाल सिंह का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वो छोटी बच्चियों को लाइन में रखा करके 100-100 के नोट बांटते नजर जा रहे थे, जिसको लेकर खूब बवाल मचा था और फिर मंत्री को सफाई देनी पड़ी थी कि बीजेपी की परंपरा है कि अच्छे काम से पहले कन्या पूजन होना चाहिए, हमारे जिले की भी यही परंपरा है कि शुभ कार्य के दौरान कन्या पूजन होता है, उसी दौरान पैसे दिए गए थे। । इस पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की बात कही है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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