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जारी रहेगा हिमाचल प्रदेश में वाहनों का मैनुअल फिटनेस टेस्ट, CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने टैक्सी-बस ऑपरेटरों को दी बड़ी राहत

Written by:Rishabh Namdev
Published:
हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर चल रही चिंता के बीच राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। दरअसल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि फिलहाल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के साथ-साथ आरटीओ और एमवीआई के जरिए मैनुअल फिटनेस टेस्ट भी जारी रहेगा। वहीं इस फैसले से टैक्सी, बस और ट्रक ऑपरेटरों को राहत मिली है।
जारी रहेगा हिमाचल प्रदेश में वाहनों का मैनुअल फिटनेस टेस्ट, CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने टैक्सी-बस ऑपरेटरों को दी बड़ी राहत

हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया है कि राज्य में फिलहाल मैनुअल फिटनेस टेस्ट की सुविधा बंद नहीं होगी। वहीं इससे टैक्सी, बस और ट्रक ऑपरेटरों को राहत मिली है जो नई ऑटोमेटेड व्यवस्था के कारण कई समस्याओं का सामना कर रहे थे। दरअसल यह आश्वासन उस समय दिया गया जब टैक्सी, बस और ट्रक ऑपरेटरों का एक प्रतिनिधिमंडल कांगड़ा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री से मिला।

दरअसल ऑपरेटरों ने बताया कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन अनिवार्य होने के बाद उन्हें फिटनेस जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि फिलहाल आरटीओ और एमवीआई के जरिए मैनुअल टेस्ट की व्यवस्था भी जारी रहेगी, ताकि ऑपरेटरों को परेशानी न हो।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) नियम जानिए

दरअसल देशभर में वाहनों की फिटनेस जांच को ज्यादा पारदर्शी और तकनीकी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन यानी एटीएस को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस सिस्टम में मशीनों और आधुनिक उपकरणों के जरिए वाहनों की तकनीकी जांच की जाती है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक सटीक मानी जाती है। हालांकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में इस व्यवस्था को लेकर कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं। कई जिलों में एटीएस की संख्या कम है और ऑपरेटरों को फिटनेस टेस्ट कराने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।

इस मुद्दे पर उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बताया कि सरकार ऑपरेटरों की समस्याओं को गंभीरता से समझ रही है। उन्होंने कहा कि एटीएस की व्यवस्था लागू करने का मकसद अच्छा है लेकिन पहाड़ी इलाकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मैनुअल टेस्ट की सुविधा जारी रखना जरूरी है।

टैक्सी और ट्रक ऑपरेटरों को मिली राहत

दरअसल एटीएस अनिवार्य होने के बाद से राज्य में टैक्सी, बस और ट्रक ऑपरेटरों के बीच काफी नाराजगी थी। उनका कहना था कि नई व्यवस्था से उनके कामकाज पर असर पड़ रहा है। कई ऑपरेटरों को फिटनेस टेस्ट के लिए कई घंटे या कभी-कभी पूरा दिन लगाना पड़ता था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाएगी, ताकि पहाड़ी राज्यों की परिस्थितियों के अनुसार नियमों में लचीलापन दिया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पूरी व्यवस्था राज्य में ठीक से लागू नहीं हो जाती, तब तक ऑपरेटरों को अनावश्यक परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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