इंदौर सेंट्रल जेल के 40 बंदियों ने जीती कोरोना से जंग, वापस लौटने पर हुआ स्वागत

इंदौर सेंट्रल जेल के 40 बंदियों ने जीती कोरोना से जंग, वापस लौटने पर हुआ स्वागत

इंदौर| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona) संकट के बीच राहत भरी खबर भी लगातार सामने आ रही है| मजबूत हौसले के साथ लोग कोरोना को मात दे रहे हैं| क्वॉरेंटाइन सेंटर (Quarantine Center) भेजे गए इंदौर सेंट्रल जेल (Indore Central Jail) के 140 बंदियों में से 40 बंदी कोरोना की जंग जीतकर वापस जेल लौट आये हैं| जेल वापस आने पर जेल में उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारियों ने बंदियों का तालियां बजाकर उत्साहवर्धन करते हुए स्वागत किया|

इन बंदियों में मुख्यतः 10 बंदी वो हैं जिनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण पाए जाने के कारण क्वॉरेंटाइन सेंटर में भेजा गया था| जहां 17 अप्रैल को इनका कोरोना सैंपलिंग कराया गया और 30 अप्रैल को संक्रमित होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी| जिसके बाद बंदियों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराया गया| इन 10 बंदियों के कोरोनावायरस निगेटिव आने के बाद शनिवार को जेल में दाखिल कराया गया|

इसी तरह जिन बंदियों में कोरोनावायरस के लक्षण चिकित्सकीय स्क्रीनिंग में पाए गए थे उन बंदियों को संक्रमण से बचाव के लिए उपरोक्त बंदियों के साथ क्वॉरेंटाइन सेंटर भेजा गया | उनमें से 30 बंदियों के कोरोना सैंपल की रिपोर्ट आज निगेटिव प्राप्त होने के बाद स्क्रीनिंग में स्वस्थ पाए जाने पर 30 बंदियों को भी जेल में दाखिल कराया गया| वहीं बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था एवं उपचार व्यवस्था में तैनात 16 प्रहरी भी जो कोरोना संक्रमण के कारण क्वॉरेंटाइन सेंटर में क्वॉरेंटाइन किए गए थे इन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव प्राप्त होने पर sabhi को fir से duty पर taenaat किया गया| वर्तमान में क्वॉरेंटाइन सेंटर में 100 बंदी क्वॉरेंटाइन रखे गए हैं जिनमें से 15 बंदी कोरोना पॉजिटिव उपचाररत है जिनकी कोरोना सैंपलिंग हो चुकी है| लेकिन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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