Indore News : नौकरी से गायब रहना पड़ा भारी, अधिकारियों ने दो पुलिस आरक्षकों को सेवाएं समाप्त की

2017 में भर्ती हुए दो आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण से गायब रहे, उसके बाद 2019 में उन्हें नोटिस दिए गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला, इसे देखते हुए अब विभाग ने दोनों की सेवाएं समाप्त कर दी।
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पुलिस में नौकरी करना कई युवाओं का सपना होता है इसकेलिए वो कई कई महीने पसीना बहाते हैं, फिजिकल टेस्ट पास करने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं लेकिन कुछ युवा ऐसे होते हैं जो नौकरी मिल जाने के बाद इसकी कद्र नहीं करते, ऐसे ही दो आरक्षकों की सेवाएं वरिष्ठ अफसरों ने समाप्त कर दी है।

2017 में पुलिस विभाग में नव आरक्षकों की भर्ती की गई थी उस दौरान इंदौर पुलिस में भर्ती हुए आरक्षकों को नियमानुसार बुनियादी प्रशिक्षण दिया गया फिर उन्हें नियमित सेवा में पदस्थ किया गया लेकिन इन्हीं आरक्षकों में से दो आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण से भी गायब रहे और नौकरी से भी गायब रहे अब इनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया है।

बुनियादी प्रशिक्षण में रहे गायब

पुलिस प्रवक्ता राजेश दंडोतिया ने जानकारी देते हुए बताया कि 2017 में नव आरक्षकों की भर्ती में दो आरक्षक सुधीर और दिलीप की भर्ती की गई थी, भर्ती हो जाने के बाद बुनियादी प्रशिक्षण में यह दोनों गैर हाजिर रहे, बीच बीच में भी ये करीब 12 से अधिक बार दोनों गैरहाजिर रहे।

दोनों आरक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया 

बिना सूचना लगातार गायब रहने के कारण 2019 में विभाग ने दोनों आरक्षकों को नोटिस भेजे लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया,  डीसीपी हेडक्वार्टर द्वारा पूरी जांच में कर्तव्य से गैर हाजिर रहने का मामला सामने आया जिसका ये निशार्ष निकाला गया कि दोनों आरक्षक इस पद के लायक नहीं है, इसलिए अनुशासनहीनता और कर्तव्य से गैर हाजिर रहने पर दोनों आरक्षकों को सेवा से पृथक कर दिया।

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इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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