इंदौर में फिर उड़ी सोशल डिस्टेंस की धज्जियां, गोदाम में लगी आग देखने उमड़ी भीड़

इंदौर में फिर उड़ी सोशल डिस्टेंस की धज्जियां, गोदाम में लगी आग देखने उमड़ी भीड़

इंदौर/आकाश धोलपुरे

इंदौर में कोरोना संकट के बीच शहर के कंटेन्मेंट क्षेत्र चन्दननगर से सटे गंगानगर में मंगलवार दोपहर आग लग गई और इसी दौरान एक बार फिर लोगों को खुलकर सोशल डिस्टेंस की अवहेलना करते देखा गया। बताया जा रहा है गंगा नगर गली नम्बर एक में स्थित पूजा टेंट हाउस के गोदाम में अचानक आग लग गई। आग ने कुछ ही देर में इतना विकराल रूप ले लिया कि दूर दूर तक उसकी लपटें दिखाई दे रही थी, वहीं क्षेत्र को काले धुएं ने अपने आगोश में ले लिया था।

इधर, आग को बढ़ता देख रहवासियों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी जिसके बाद दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरु किया गया। क्षेत्र की गलियां संकरी होने के कारण आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। फायर पुलिस ने आशंका जताई है कि आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी है और माना जा रहा है कि आग लगने के चलते लाखो के टेंट का सामान जलकर खाक हो गया। जिस वक्त ये आग लगी उस वक्त क्षेत्र में लगी आग को देखने के चक्कर में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और सभी सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का मखौल उड़ाते नजर आए।  फ़ायर ब्रिगेड ने आग पर तो काबू पा लिया है लेकिन सवाल अब उस भीड़ पर भी उठ रहे है जो कोरोना संकट काल के दौरान सोशल डिस्टेसिंग को धता बताकर मनमानी करने पर उतारू थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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