बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग

जबलपुर हाईकोर्ट में बरगी डैम क्रूज हादसे को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले में आरोपी विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और जांच पूरी होने तक बोट सेवाओं को बंद करने की मांग की गई है। 
Bargi Dam Cruise Tragedy

जबलपुर बरगी डैम में 30 अप्रैल को क्रूज हादसे (Bargi Dam Cruise Tragedy) में 13 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस घटना ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है। भोपाल के निवासी केके राठी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। जिसमें इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में इस घटना का कारण प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानव की अनदेखी को बताया गया है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में संचालित सभी वॉटर स्पोर्ट्स और क्रूज सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने की मांग की गई है।

पर्यटन विभाग पर लपवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

याचिककर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय रहित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन भी नहीं किया गया। खराब मौसम और येलो अलर्ट के बाद भी क्रूज संचालन जारी रखा गया। याचिका में यह दावा किया गया है कि हादसे से पहले यात्रियों को प्राप्त सुरक्षा जानकारी भी नहीं दी गई थी। न ही लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाया गया था। यदि सही तरीके से सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो इस घटना को टाला जा सकता था। पर्यटन विभाग की लापरवाही से गई लोगों की मौत हो गई। इसलिए हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच पूरी होने तक क्रूज और बोट सेवाओं पर रोक की मांग

याचिका में जांच पूरी होने तक मध्य प्रदेश में सभी क्रूज और वोट सेवाओं पर अस्थाई रूप से बंद करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा राज्य के सभी वॉटर स्पोर्ट्स केंद्रों और पर्यटन स्थलों का सेफ्टी ऑडिट करने की मांग भी कोर्ट के सामने रखी गई है। ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हो। पर्यटकों के लिए सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

जिला कोर्ट ने दिखाई सख्ती, नाव संचालक को फटकार  

बुधवार को लोअर कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नाव संचालक को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने पाया की नाव संचालक ने अनुभव होते हुए यात्रियों की मदद नहीं की और खुद को बचाकर वहां से निकल गया। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कोर्ट ने BNS 2023 की धारा 106 और 110 के तहत चालक समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया था।

Manisha Kumari Pandey
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