हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर कांग्रेस की आपत्ति खारिज, रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार किया नामांकन, आरके लोहानी का पर्चा निरस्त

मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। कांग्रेस ने उनके नामांकन पत्र और चुनावी हलफनामे में कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे खारिज कर दिया।
हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर कांग्रेस की आपत्ति खारिज, रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार किया नामांकन, आरके लोहानी का पर्चा निरस्त

मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है। दरअसल बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार कर लिया है। बता दें कांग्रेस ने उनके चुनावी हलफनामे और नामांकन पत्र में कई कमियां बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उसे खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस प्रत्याशी आरके लोहानी और पार्टी नेता अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

दरअसल भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान मंगलवार को बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी आरके लोहानी ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर सवाल उठाए थे। पार्टी ने उनके हलफनामे में पत्नी का नाम, संपत्ति और विदेशी बैंक खातों से जुड़ी जानकारी सहित कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज करते हुए पुरी का नामांकन स्वीकार कर लिया।

निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

वहीं इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि नामांकन की जांच के दौरान समान नियमों का पालन नहीं किया गया। कांग्रेस का कहना है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। दूसरी ओर नामांकन जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी आरके लोहानी और एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार का पर्चा भी खारिज किया गया।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है। दरअसल बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार कर लिया है। बता दें कांग्रेस ने उनके चुनावी हलफनामे और  नामांकन पत्र में कई कमियां बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उसे खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस प्रत्याशी आरके लोहानी और पार्टी नेता अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

दरअसल भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान मंगलवार को बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी आरके लोहानी ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर सवाल उठाए थे। पार्टी ने उनके हलफनामे में पत्नी का नाम, संपत्ति और विदेशी बैंक खातों से जुड़ी जानकारी सहित कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज करते हुए पुरी का नामांकन स्वीकार कर लिया।

निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

वहीं इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि नामांकन की जांच के दौरान समान नियमों का पालन नहीं किया गया। कांग्रेस का कहना है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। दूसरी ओर नामांकन जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी आरके लोहानी और एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार का पर्चा भी खारिज किया गया।

जानिए कांग्रेस ने क्यों जताई आपत्ति?

दरअसल कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के साथ जमा किए गए हलफनामे पर कई सवाल उठाए थे। कांग्रेस का आरोप था कि हलफनामे में उनकी पत्नी का नाम और उनसे जुड़ी संपत्ति की जानकारी पूरी तरह नहीं दी गई है। इसके अलावा विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के विवरण को लेकर भी पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि हलफनामे में कुछ संपत्तियों का मूल्य स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर में बताया गया है। उन्होंने जेनेवा स्थित अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों से जुड़ी जानकारी पर भी सवाल उठाए। हेमंत कटारे ने शपथ पत्र की नोटरी प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि चुनावी हलफनामे को तय नियमों के मुताबिक शपथ लेकर जमा किया जाना चाहिए जबकि पुरी के दस्तावेज में इस प्रक्रिया को लेकर कमी है।

वहीं कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने भी नामांकन पत्र में कथित गलतियों को गंभीर बताते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के सामने लिखित आपत्ति रखी थी। पार्टी की मांग थी कि इन कमियों के आधार पर हरदीप पुरी का नामांकन निरस्त किया जाए। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए उनका नामांकन स्वीकार कर लिया। अब कांग्रेस इसी फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

आरके लोहानी का नामांकन भी हुआ था खारिज

दरअसल भोपाल के समाजसेवी आरके लोहानी ने कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान उनके नामांकन के साथ जरूरी फॉर्म-26 शपथ पत्र नहीं मिलने के कारण पर्चा खारिज कर दिया गया। इस फॉर्म में उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देनी होती है।

वहीं आरके लोहानी ने नामांकन खारिज होने पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि दस्तावेज ई-मेल के जरिए भेजा गया था लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। दूसरी ओर, हरदीप पुरी के नामांकन पर आपत्ति आने के बाद बीजेपी को जवाब देने के लिए समय दिया गया। कांग्रेस ने इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी के फैसले में भेदभाव का आरोप लगाया है।

जानिए कांग्रेस ने क्यों जताई आपत्ति?

दरअसल कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के साथ जमा किए गए हलफनामे पर कई सवाल उठाए थे। कांग्रेस का आरोप था कि हलफनामे में उनकी पत्नी का नाम और उनसे जुड़ी संपत्ति की जानकारी पूरी तरह नहीं दी गई है। इसके अलावा विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के विवरण को लेकर भी पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि हलफनामे में कुछ संपत्तियों का मूल्य स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर में बताया गया है। उन्होंने जेनेवा स्थित अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों से जुड़ी जानकारी पर भी सवाल उठाए। हेमंत कटारे ने शपथ पत्र की नोटरी प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि चुनावी हलफनामे को तय नियमों के मुताबिक शपथ लेकर जमा किया जाना चाहिए जबकि पुरी के दस्तावेज में इस प्रक्रिया को लेकर कमी है।

वहीं कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने भी नामांकन पत्र में कथित गलतियों को गंभीर बताते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के सामने लिखित आपत्ति रखी थी। पार्टी की मांग थी कि इन कमियों के आधार पर हरदीप पुरी का नामांकन निरस्त किया जाए। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए उनका नामांकन स्वीकार कर लिया। अब कांग्रेस इसी फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

आरके लोहानी का नामांकन भी हुआ था खारिज

दरअसल भोपाल के समाजसेवी आरके लोहानी ने कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान उनके नामांकन के साथ जरूरी फॉर्म-26 शपथ पत्र नहीं मिलने के कारण पर्चा खारिज कर दिया गया। इस फॉर्म में उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देनी होती है।

वहीं आरके लोहानी ने नामांकन खारिज होने पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि दस्तावेज ई-मेल के जरिए भेजा गया था लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। दूसरी ओर, हरदीप पुरी के नामांकन पर आपत्ति आने के बाद बीजेपी को जवाब देने के लिए समय दिया गया। कांग्रेस ने इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी के फैसले में भेदभाव का आरोप लगाया है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
Rishabh Namdev

4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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